तासौं ही कछु पाइए, कीजै जाकी आस रीते सरवर पर गए, कैसें बुझे पियास कवि रहीम कहते हैं कि उसी व्यक्ति के पास जाइये जिससे आशा हो। सूखे तालाब के पास जाने से कभी भी किसी जीव की प्यास नहीं बुझ सकती। संपादकीय… more →
***दीपक भारतदीप की हिंदी पत्रिका*** ***Deepak Bharatdeep ki Hindi patrika***दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: रहिमन खोटी आदि की, सो परिनाम लखाय जैसे दीपक तम भखै, कज्जल वमन कराय कविवर रहीम कहते हैं कि बुराई होने … more →
दीपक भारतदीप wrote 7 months ago: समय परे ओछे बचन, सब के सहे रहीम सभा दुसासन पट गहे, गदा लिए रहे भीम कविवर रहीम कहते हैं कि बुरा समय आ … more →
दीपक भारतदीप wrote 7 months ago: रहिमन राम न उर धरै, रहत विषय लपटाय पसु खर खात सवाद सों, गुर बुलियाए खाय कविवर रहीम कहते है कि भगवान … more →
दीपक भारतदीप wrote 10 months ago: रहिमन अति न कीजिए, गहि रहिए निज कानि सैंजन अति फूलै तऊ, डार पात की हानि कविवर रहीम कहते हैं कि कभी भ … more →
दीपक भारतदीप wrote 11 months ago: रहिमन चाक कुम्हार को, मांगे दिया ना देह छेद में डंडा डारि कै, चहै नांद लै लेइ कविवर रहीम कह्ते हैं क … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: सरवर के खग एक से, बाढ़त प्रीति न धीम पै मराल को मानसर, एकै ठौर रहीम अधिकतर पक्षी एक समान होते हैं। उ … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: रहिमन कुटिल कुठार ज्यों, करि डारत द्वै टूक चतुरन के कसक्त रहे समय चूक की हूक कविवर रहीम कहते हैं की … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: जानि अनीती जे करैं, जागत ही रह सोई। ताहि सिखाई जगाईबो, उचित न होई ॥ अर्थ-समझ-बूझकर भी जो व्यक्ति अन् … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: जलहिं मिले रहीम ज्यों किल्यो आप सम छीर अंगवहि आपुहि त्यों, सकल आंच की भीर कविवर रहीम का कहाँ है की ज … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: कौन बडाई जलधि मिली, गंग नाम भी धीम केहि की प्रभुता नहिं घटी, पर घर गए रहीम कविवर रहीम कहते हैं कि सम … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: तासौं ही कछु पाइए, कीजै जाकी आस रीते सरवर पर गए, कैसें बुझे पियास कवि रहीम कहते हैं कि उसी व्यक्ति क … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: रहिमन थोरे दिनन को, कौन करे मुहँ स्याह नहीं छलन को परतिया, नहीं कारन को ब्याह कवि रहीम कहते हैं कि क … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: तासौं ही कछु पाइए, कीजै जाकी आस रीते सरवर पर गए, कैसें बुझे पियास कवि रहीम कहते हैं कि उसी व्यक्ति क … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: यह रहीम निज संग लै, जनमत जगत न कोय बैर, प्रीति, अभ्यास, जस, होत होत ही होय कविवर रहीम कहते हैं की पर … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: मथत मथत माखन रही, दही मही बिलगाव रहिमन सोई मीत हैं, भीर परे ठहराय कविवर रहीम कहते हैं कि जब दही को ल … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: जब लगि जीवन जगत में, सुख दुख मिलन अगोट रहिमन फूटें गोट ज्यों, परत दुहुन सुर चोट कविवर रहीम कहते हैं … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: रहिमन अति न कीजिए, गहि रहिये निज कानि सैजन अति फूले तऊ, दार पात की हानि अर्थ-कवि रहीम कहते हैं कि कि … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: रहिमन जगत बडाई की, कूकुर की पहिचानि प्रीती करे मुख छाती, बैर करे तन हानि कविवर रहीम कहते हैं की अपनी … more →
संपादक- मिथिलेश वामनकर wrote 1 year ago: अब्दुर्रहीम खान खाना – संक्षिप्त परिचय नवाब अब्दुर्रहीम खान खाना मध्यकालीन भारत के कुशल राजन … more →