विनय wrote 1 year ago: तेरी यादों के साये तले जाने हम- कितनी दूर तक चले क्या ख़बर कब… थकते क़दमों की शाम ढले जाने कब प … more →
विनय wrote 1 year ago: तेरी यादों के, तेरे ख़ाबों के, साये तले हम कितनी दूर निकल आये, कहाँ चले तेरी यादों की धुँधली शाम … more →