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Blogs about: राग धना श्री

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लाल कछु कीजे भोजन तिल तिल कारी हों वारी हों

pushtimarg wrote 1 year ago: लाल कछु कीजे भोजन तिल तिल कारी हों वारी हों। अब जाय बैठो दोउ भैया नंदबाबा की थारी हो॥१॥ कहियत हे आज … more →

Tags: परमानंददास जी, मकर सक्रांति के पद

पतंग की गुडी उडावन लागे व्रजबाल

pushtimarg wrote 1 year ago: पतंग की गुडी उडावन लागे व्रजबाल॥ सुंदर पताका बांधे मनमोहन बाजत मोरन के ताल॥१॥ कोउ पकरत कोउ खेंचत कोउ … more →

Tags: परमानंददास जी, मकर सक्रांति के पद

ग्वालिन मेरी गेंद चुराई।

pushtimarg wrote 1 year ago: ग्वालिन मेरी गेंद चुराई। खेलत आन परी पलका पर अंगिया मांझ दुराई॥१॥ भुज पकरत मेरी अंगिया टटोवत छुवत छं … more →

Tags: सूरदास जी, मकर सक्रांति के पद

रानी तेरो चिरजीयो गोपाल1 comment

pushtimarg wrote 2 years ago: रानी तेरो चिरजीयो गोपाल । बेगिबडो बढि होय विरध लट, महरि मनोहर बाल॥१॥ उपजि पर्यो यह कूंखि भाग्य बल, स … more →

Tags: सूरदास जी, जन्माष्टमी, आशीष


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