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Blogs about: राग बिहाग

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जप तप तीरथ नेम धरम

pushtimarg wrote 1 year ago: जप तप तीरथ नेम धरम व्रत मेरे श्री वल्लभ प्रभु जी कौ नाम। सुमिरों मन सदा सुखकारी दुरित कटै सुधरे सब क … more →

Tags: महाप्रभू जी की बधाई, रसिक दास, महाप्रभु जी का उत्सव

श्री वल्लभ मधुराकृति मेरे2 comments

pushtimarg wrote 1 year ago: श्री वल्लभ मधुराकृति मेरे। सदा बसो मन यह जीवन धन सबहिन सों जु कहत हों टेरे॥१॥ मधुर बचन अरु नयन मधुर … more →

Tags: हरिदास जी, महात्म्य, महाप्रभू जी की बधाई

प्रगट व्है मारग रीत बताई।

pushtimarg wrote 1 year ago: प्रगट व्है मारग रीत बताई। परमानंद स्वरूप कृपानिधि श्री वल्लभ सुखदाई॥१॥ करि सिंगार गिरिधरनलाल कों जब … more →

Tags: महात्म्य, महाप्रभू जी की बधाई, हरिदास जी

रावल के कहे गोप

pushtimarg wrote 2 years ago: रावल के कहे गोप आज व्रजधुनि ओप कान देदे सुनों बाजे गोकुल मंदिलरा। जसोदा के पुत्र भयो वृषभानजूसो कह्य … more →

Tags: चतुर्भुज दास जी, जन्माष्टमी

परम कृपाल श्री वल्लभ नंदन

pushtimarg wrote 2 years ago: परम कृपाल श्री वल्लभ नंदन करत कृपा निज हाथ दे माथे । जे जन शरण आय अनुसरही गहे सोंपत श्री गोवर्धननाथ … more →

Tags: कृष्णदास जी, आश्रय महात्म्य दीनत

हमारे श्री विट्ठल नाथ धनी1 comment

pushtimarg wrote 2 years ago: हमारे श्री विट्ठल नाथ धनी । भव सागर ते काढे कृपानिधी राखे शरन अपनी ॥१॥ रसना रटत रहत निशिवासर शेष सहस … more →

Tags: छीतस्वामी जी, आश्रय महात्म्य दीनत

वृंदावन एक पलक जो रहिये।

pushtimarg wrote 2 years ago: वृंदावन एक पलक जो रहिये। जन्म जन्म के पाप कटत हे कृष्ण कृष्ण मुख कहिये ॥१॥ महाप्रसाद और जल यमुना को … more →

Tags: सूरदास जी, आश्रय महात्म्य दीनत

तिहारे चरन कमल को माहत्म्य

pushtimarg wrote 2 years ago: तिहारे चरन कमल को माहत्म्य शिव जाने के गौतम नारी । जटाजुट मध्य पावनी गंगा अजहु लिये फिरत त्रिपुरारी … more →

Tags: परमानंददास जी, आश्रय महात्म्य दीनत

४१. शरण प्रतिपाल गोपाल रति वर्धिनी

pushtimarg wrote 2 years ago: शरण प्रतिपाल गोपाल रति वर्धिनी । देत पिय पंथ कंथ सन्मुख करत , अतुल करुणामयी नाथ अंग अर्द्धिनी ॥१॥ दी … more →

Tags: कृष्णदास जी, यमुना जी के ४१ पद

दृढ इन चरणन केरो

pushtimarg wrote 3 years ago: दृढ इन चरण कैरो भरोसो, दृढ इन चरणन कैरो श्री वल्लभ नख चंद्र छ्टा बिन, सब जग माही अंधेरो । भरोसो … more →

Tags: आश्रय के पद, सूरदास जी


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