गुण अपार मुख एक कहाँ लों कहिये । तजो साधन भजो नाम श्री यमुना जी को लाल गिरिधरन वर तबहि पैये ॥१॥ परम पुनीत प्रीति की रीति सब जानिके दृढकरि चरण कमल जु गहिये । छीतस्वामी गिरिधरन श्री विट्ठल , ऐसी निधि छा… more →
पुष्टिमार्गpushtimarg wrote 3 years ago: गुण अपार मुख एक कहाँ लों कहिये । तजो साधन भजो नाम श्री यमुना जी को लाल गिरिधरन वर तबहि पैये ॥१॥ परम … more →
pushtimarg wrote 3 years ago: धन्य श्री यमुने निधि देनहारी । करत गुणगान अज्ञान अध दूरि करि, जाय मिलवत पिय प्राणप्यारी ॥१॥ जिन कोउ … more →
pushtimarg wrote 3 years ago: जा मुख तें श्री यमुने यह नाम आवे । तापर कृपा करत श्री वल्लभ प्रभु, सोई श्री यमुना जी को भेद पावे ॥१॥ … more →
pushtimarg wrote 3 years ago: धाय के जाय जो श्री यमुना तीरे । ताकी महिमा अब कहां लग वरनिये, जाय परसत अंग प्रेम नीरे ॥१॥ निश दिना क … more →