सुनो री आज नवल बधायो हे । श्री लक्ष्मण गृह प्रकट भये हैं श्री वल्लभ मन भायो हे ॥१॥ बाजत आवज ढोलक महुवर घनज्यो ढोल बजायो हे। कोकिल कंठ नवल वनिता मिल मंगल गायो हे ॥२॥ हरदी तेल सुगंध सुवासित लालन उबट न्ह… more →
पुष्टिमार्गpushtimarg wrote 2 years ago: सुनो री आज नवल बधायो हे । श्री लक्ष्मण गृह प्रकट भये हैं श्री वल्लभ मन भायो हे ॥१॥ बाजत आवज ढोलक महु … more →
pushtimarg wrote 3 years ago: नैन भरि देखि अब भानु तनया । केलि पिय सों करें भ्रमर तबहि परें, श्रम जल भरत आनंद मनया ॥१॥ चलत टेढी हो … more →
pushtimarg wrote 3 years ago: कहत श्रुतिसार निर्धार करिकें । इन बिना कौन ऐसी करे हे सखी, हरत दुख द्वन्द सुखकंद बरखें ॥१॥ ब्रह्मसंब … more →
pushtimarg wrote 3 years ago: श्याम सुखधाम जहाँ नाम इनके । निशदिना प्राणपति आय हिय में बसे, जोई गावे सुजश भाग्य तिनके ॥१॥ येही जग … more →
pushtimarg wrote 3 years ago: पिय संग रंग भरि करि किलोलें । सबन कों सुख देन पिय संग करत सेन,चित्त में परत चेन जब हीं बोलें ॥१॥ अति … more →