हेत करि देत श्री यमुने वास कुंजे । जहाँ निसवासर रास में रसिकवर, कहां लों वरनिये प्रेमपुंजे ॥१॥ थकित सरिता नीर थकित ब्रजबधू भीर, कोउ न धरत धीर मुरली सुनीजे । चतुर्भुजदास यमुने पंकज जानि, मधुप की नामी च… more →
पुष्टिमार्गpushtimarg wrote 3 years ago: हेत करि देत श्री यमुने वास कुंजे । जहाँ निसवासर रास में रसिकवर, कहां लों वरनिये प्रेमपुंजे ॥१॥ थकित … more →
pushtimarg wrote 3 years ago: वारंवार श्रीयमुने गुणगान कीजे । एहि रसनातें भजो नामरस अमृत भाग्य जाके हैं सोई जु पीजे ॥१॥ भानु तनया … more →