तरणि तनया तीर आवत हें प्रात समे गेंद खेलत देख्योरी आनंद को कंदवा। काछिनी किंकणि कटि पीतांबर कस बांधे लाल उपरेना शिर मोरन के चंदवा॥१॥ पंकज नयन सलोल बोलत मधुरे बोल गोकुल की सुंदरी संग आनंद स्वछंदवा। कृष… more →
पुष्टिमार्गpushtimarg wrote 1 year ago: तरणि तनया तीर आवत हें प्रात समे गेंद खेलत देख्योरी आनंद को कंदवा। काछिनी किंकणि कटि पीतांबर कस बांधे … more →
pushtimarg wrote 2 years ago: दोउ भैया मांगत मैया पें देरी मैया दधि माखन रोटी । सुनरी भामते बोल सुतन के झुठेइ धाम के काम अंगोटी ॥१ … more →
pushtimarg wrote 2 years ago: खिलावन आवेंगी ब्रजनारी । जागो लाल चिरैया बोली कहि जसुमति महतारी ॥१॥ ओट्यो दूध पान करि मिहन वेगि करो … more →
pushtimarg wrote 3 years ago: जागिये ब्रजराज कुँवर, कमल कुसुम फूले । कुमुद वृन्द सकुचित भये,भृंग लता भूले ॥१॥ तमचर खग रोर सुनहु, ब … more →
pushtimarg wrote 3 years ago: प्रात समय श्री वल्ल्लभ सुत को, पुण्य पवित्र विमल यश गाऊँ । सुन्दर सुभग वदन गिरिधर को, निरख निरख दोउ … more →