गोपन सों यह कन्हाई। जो हो कहत रह्यो भयो सोइ सपनांतर की प्रकट जनाई॥१॥ जो मांग्यो चाहो सो मांगो, पावोगे सोई मन भाई। कहत नंद हम ऐसी मांगे चाहत हैं हरि की कुशलाई॥२॥ कर जोरे व्रजपति जू ठाडे गोवर्धन की करत … more →
पुष्टिमार्गpushtimarg wrote 2 years ago: गोपन सों यह कन्हाई। जो हो कहत रह्यो भयो सोइ सपनांतर की प्रकट जनाई॥१॥ जो मांग्यो चाहो सो मांगो, पावोग … more →
pushtimarg wrote 2 years ago: गोपी प्रेम की ध्वजा । निज गोपाल किते अपने वश उरधर श्याम भुजा ॥१॥ शुक मुनि व्यास प्रशंसा कीनी ऊधो संत … more →