प्रयोग की शक्ति प्रचार से अधिक है। प्रचार योजनाबद्ध और बोझिल होता है जबकि प्रयोग सरल और स्वतः होता है। हिंदी – आम-आदमी की भाषा है। अनपढ़ गंवार की भाषा है। पर जब उसे नामी लोग बोलते हैं तो हिंदी की… more →
पसंदप्रेमलता पांडे wrote 2 months ago: प्रयोग की शक्ति प्रचार से अधिक है। प्रचार योजनाबद्ध और बोझिल होता है जबकि प्रयोग सरल और स्वतः होता ह … more →
प्रेमलता पांडे wrote 4 months ago: ब्लॉग पर लिखी सामग्री साहित्य का प्रकार है या नहीं? यह प्रश्न ऐसा ही है जैसे ’(मानव का) बच्चा मनुष्य … more →
प्रेमलता पांडे wrote 1 year ago: ((हिंदी-विवश-दिवस पर विशेष) हू!हू!हू!हिंदी! होय!होय!हिंदी! राइट इन हिंदी, रीड इन हिंदी, फाइट इन हिंद … more →
प्रेमलता पांडे wrote 2 years ago: हिंदी भारत के जन-जन की भाषा है। मजदूर की भाषा है, रिक्शे वाले की भाषा है, दर्जी की भाषा है, किसान की … more →
प्रेमलता पांडे wrote 2 years ago: दिन फिर गए! यूँ तो हिंदी का बहाव किसी भी रुकावट से रुका नही है। हमेशा वेगमय ही रहा है। संस्कृत से … more →
प्रेमलता पांडे wrote 2 years ago: हमारे देश की राजभाषा और राष्ट्रभाषा हिंदी है। इस विषय में कुछ महान हस्तियों के विचार और कथन भी महत्त … more →