वे कभी बहस नहीं करते या फिर हर वक़्त बहस करते हैं वे हमेशा एक ही बात पर बहस करते हैं या फिर बहुत-सी बातों पर बहस करते हैं एक ही समय वे बहस को कभी निष्कर्ष की तरफ़ नहीं ले जाते वे निष्कर्ष लेकर आते हैं… more →
यही है वह जगहPRIYANKAR wrote 2 months ago: राजेन्द्र राजन की एक कविता पश्चाताप महान होने के लिए जितनी ज्यादा सीढ़ियाँ मैंने चढ़ीं उतनी ही … more →
PRIYANKAR wrote 3 months ago: राजेन्द्र राजन की एक कविता बस यही एक अच्छी बात है मेरे मन में नफरत और गुस्से की आग कुंठाओं क … more →
अफ़लातून wrote 4 months ago: श्रेय पत्थर अगर तेरहवें प्रहार में टूटा तो इसलिए टूटा कि उस पर बारह प्रहार हो चुके थे तेरहवां प्रह … more →
अफ़लातून wrote 4 months ago: छुटपन में ऐसा होता था अक्सर कि कोई टोके कि फल के साथ ही तुमने खा लिया है बीज इसलिए पेड़ उगेगा तुम्हार … more →
अफ़लातून wrote 10 months ago: वे कभी बहस नहीं करते या फिर हर वक़्त बहस करते हैं वे हमेशा एक ही बात पर बहस करते हैं या फिर बहुत-सी … more →
अफ़लातून wrote 1 year ago: अयोध्या का यही अर्थ हम जानते थे जहाँ न हो युद्ध हो शांति का राज्य अयोध्या की यही नीति हम जानते थे ज … more →
अफ़लातून wrote 1 year ago: चिराग़ की तरह पवित्र और जरूरी शब्दों को अंधेरे घरों तक ले जाने के लिए हम आततायियों से लड़ते रहे थके-हा … more →
अफ़लातून wrote 1 year ago: जैसे बीज पुकारता है बीज को जैसे खोज पुकारती है खोज को जैसे राह पुकारती है राह को शब्द, शब्द को पुका … more →
अफ़लातून wrote 1 year ago: महान होने के लिए जितनी ज्यादा सीढ़ियाँ मैंने चढ़ीं उतनी ही ज्यादा क्रूरताएं मैंने कीं ज्ञानी होने के … more →
अफ़लातून wrote 1 year ago: निश्चिन्त होकर वे जा चुके थे उस सुनसान जगह से अपनी बंदूकों , तोपों , बचे हुए विस्फोट … more →
अफ़लातून wrote 1 year ago: वे हर वक्त पिले रहते हैं इतिहास में अपनी जगह बनाने में सिर्फ उन्हें मालूम है कितनी जगह है इति … more →
अफ़लातून wrote 1 year ago: उन्हें कभी नहीं सताता पराजय का बोध वे हमेशा विजेताओं की जय बोलते हैं अखंड होता है उनका विश्वास कि व … more →