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Blogs about: रात

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मेरे दिन रात 1 comment

प्रवीण wrote 3 weeks ago: दिन, दिन तू ये कहने को है ! रात, रात तू ये कहने को है! हमारी रात तू तब होती है, जब आपकी जुल्फ़ की चि … more →

Tags: कविता, कविता ब्लॉग, दिन, हिंदी कविता, हिंदी ब्लॉग, Hindi Kavtia, Hindi Poem, Kavita

रात के अंधेरे ही सही - अनीस इमाम17 comments

रवि कुमार, रावतभाटा wrote 2 months ago: रात के अंधेरे ही सही – अनीस इमाम ( a kavita poster by ravi kumar, rawatbhata) शब्दों के कुछ सम … more →

Tags: कविता-पोस्टर, अंधेरा, अनीस इमाम, सूरज

कल रात भर......6 comments

Gayatri wrote 4 months ago: सर्द मौसम से दामन बचाते गिलाफो में खुद को छुपाते काफ़ी की गरम चुस्की लगाते यूं ही अचानक… तेरी य … more →

Tags: कविता, कल

इस रात का क्या करे...8 comments

प्रवीण wrote 5 months ago: मेरे घर की खिड़की से स्टॉकहोम शहर का एक दृश्य, रात ११:०० pm, जून २००९. आपकी याद में दिन गुजर जाता है … more →

Tags: कविता, कविता ब्लॉग, तन्हाई, प्यार, हिंदी कविता, हिंदी ब्लॉग, Hindi Kavtia, Hindi Poem, Kavita

आज फिर मन उदास है, 1 comment

Nidhi KM wrote 6 months ago: आज फिर मन उदास है, कोई अपना नही पास है…               चल रही हूँ जिन रहो मे,               कभी … more →

Tags: कविताएँ, कुछ पंक्तियाँ, nidhi, तूफ़ान, अपना, आज, मन, पास, कभी

हुआ है आज उनका फ़ैसला मेरे ख़िलाफ़9 comments

विनय wrote 7 months ago: हुआ है आज उनका फ़ैसला मेरे ख़िलाफ़ सुनने में आया है न करेंगे मुझे मुआफ़ उस ने एक भी मौक़ा न दिया मुझ को … more →

Tags: मेरी ग़ज़ल, against, ख़िलाफ़, दिल, मुआफ़, मौक़ा, लिहाफ़, शिगाफ़, साफ़

ये कैसा मौसम है दोस्‍तो!4 comments

prithvi wrote 7 months ago: ये कैसा मौसम है दोस्‍तो! …. चांद पूरा है. पूरा का पूरा. चमकता हुआ. तड़के पौने पांच बजे छत पर ज … more →

Tags: गांव- गुवाड़, राजस्‍थान, मौसम, चैत वैशाख, हाड़ी, ओलावृष्टि, फसल, किसान, पूर्णिमा

रातभर चाँद देखा किये15 comments

विनय wrote 10 months ago: रातभर चाँद देखा किये माज़ी में उड़ रहीं थीं तेरी यादें समेटा किये रातभर चाँद देखा किये कभी हाथ से ढका … more →

Tags: मेरा गीत, इश्क़, ख़ामोश, ख़ाली, गदेली, चाँद, तन्हाई, तस्वीर, नाम

कुछ तो था कुछ तो है12 comments

विनय wrote 11 months ago: कुछ तो था कुछ तो है तेरे-मेरे बीच सजनी वरना तुम यहाँ न आती वरना यादें तेरी न होती यूँ बरस गुज़रते हैं … more →

Tags: मेरा गीत, Alone, इश्क़, ख़ाब, ख़ुशी, ग़म, तन्हा, दरम्याँ, दिन

धीरे-धीरे ग़म सहना5 comments

विनय wrote 1 year ago: धीरे-धीरे ग़म सहना, किसी से कुछ न कहना फ़ितरत ऐसी हो गयी, दिन-रात मरके जीना शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़ … more →

Tags: रुबाइयाँ, इश्क़, Love, प्यार, फ़ितरत, मोहब्बत, प्रेम, Night, ग़म

आज काली रात है तो क्या...

Amarjeet Singh wrote 1 year ago: आज काली रात है तो क्या, कल चाँदनी रात होगी, आज तपती धुप है तो क्या, कल मौसम-ऐ-बहार होगी, आज खाली हाथ … more →

Tags: अमरजीत सिंह, amar, amarjeet, अमर, अमरजीत, amarjeet singh, काली रात, चाँदनी, मौसम-ऐ-बहार

निशा प्रिया4 comments

Grey Rainbow - स्याह इंद्रधनुष wrote 1 year ago: तुमसे दूर यहाँ भी साँझ ढलती है, रात के किनारे पर अब टहलती है । उसके आँचल में बँधा तुमसे दूरी का अहसा … more →

Tags: Kavita, Poetry, कविता, निशा

शबनमी सर्द रात है और ख़्याल तेरा

विनय wrote 1 year ago: शबनमी सर्द रात है और ख़्याल तेरा चाँद तन्हा मैं तन्हा और ख़्याल तेरा सबसे छुपाया पर छुपा न राज़े-मोहब … more →

Tags: रुबाइयाँ, चाँद, इश्क़, दोस्त, Love, प्यार, मोहब्बत, तन्हा, शबनमी

मैं आँखों के लिए ख़ाब खरीदने निकला3 comments

विनय wrote 1 year ago: मैं आँखों के लिए ख़ाब खरीदने निकला सितारों के लिए चाँद ढूँढ़ने निकला दिन अदा किया तब रात नसीब हुई हर … more →

Tags: मेरी ग़ज़ल, ख़ाब, चाँद, इश्क़, Love, eyes, प्यार, मोहब्बत, सुरमई

इस जानिब य उस जानिब

विनय wrote 1 year ago: इस जानिब य उस जानिब कौन ‘नज़र’ है कौन ‘ग़ालिब’ एक बला है दर्दे-निहाँ कौन बुरा … more →

Tags: मेरी ग़ज़ल, ख़ाब, जानिब, नज़र, dream, Night, ज़ख़्म, Silence, दिन

शबनम यूँ सुलगी रात सोते पत्तों पर

विनय wrote 1 year ago: शबनम यूँ सुलगी रात सोते पत्तों पर जैसे वह मुझको मिले और मिले भी ना चाँद खिड़की पर बैठकर मुझे देखता ह … more →

Tags: मेरी त्रिवेणी, चाँद, इश्क़, Love, Reminisce, प्यार, याद, मोहब्बत, Pain

तन्हाई यूँ ढूँढ़ती है मुझे2 comments

विनय wrote 1 year ago: तन्हाई यूँ ढूँढ़ती है मुझे जैसे मेरी सदा तुम्हें जो दीवारें ख़ुद-ब-ख़ुद गिरती हैं मैं कैसे चुनावाऊँ … more →

Tags: मेरा गीत, इश्क़, ओस, ख़िज़ाँ, ख़ुशरंग, खुष्क, गहने, तन्हाई, दर्द

ज़हर पीकर जीने चले2 comments

विनय wrote 1 year ago: ज़हर पीकर जीने चले कच्चे-पक्के ज़ख़्म सीने चले आँसू सूखे हुए थे पलकों से बरसते हैं सितारे सारी रात चाँ … more →

Tags: मेरा गीत, ज़िन्दगी, चाँद, इश्क़, Love, पलाश, आइना, प्यार, मोहब्बत

जैसे-तैसे निभाते हैं

विनय wrote 1 year ago: जैसे-तैसे निभाते हैं प्यार करके पछताते हैं सच्चे-झूठे सपने तेरे रातों की नींदें उड़ाते हैं दो किनारे … more →

Tags: मेरा गीत, उम्मीद, इश्क़, लोग, Love, प्यार, मोहब्बत, सपना, regret


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