नित उड़ता हूँ तेरी कजरारी अँखियों में मैं रंग-बिरंगे सपनों की छतरी लेके साँवले का मन लुभाके, बिजली गिराके राधा चली कहाँ ऐसे गगरी सँभाले इठलाती है बल खाती है जिया जलाती है राधा काहे साँवले से इतना इतरा… more →
तख़लीक़-ए-नज़रaspundir wrote 10 months ago: श्रीकृष्ण कीलक ॐ गोपिका-वृन्द-मध्यस्थं, रास-क्रीडा-स-मण्डलम्। क्लम प्रसति केशालिं, भजेऽम्बुज-रूचि हर … more →
विनय wrote 1 year ago: नित उड़ता हूँ तेरी कजरारी अँखियों में मैं रंग-बिरंगे सपनों की छतरी लेके साँवले का मन लुभाके, बिजली ग … more →