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Blogs about: रामायण

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‘मा निषाद प्रतिष्ठां त्वमगमः ...’ - बाल्मीकि रामायण का आधारभूत श्लोक2 comments

योगेन्द्र जोशी wrote 2 months ago: महर्षि बाल्मीकि द्वारा रचित ग्रंथ ‘रामायण’ को संस्कृत साहित्य का प्रथम महाकाव्य कहा जाता है । यह महा … more →

Tags: संस्कृत-साहित्य, ramayana, आदिकवि, छंद, बाल्मीकि, श्लोक, balmiki

हिन्दी के कवि और शायर बिना पढ़े ही गीता पर लिखते हैं-हिन्दी आलेख (Hindi poet writes on without reading the Gita - Hindi article)

दीपक भारतदीप wrote 3 months ago: अक्सर अनेक कवितायें, शायरियों गीत, और गद्य रचनायें हमारे सामने आती हैं जिसमें भारतीय धर्म ग्रंथों के … more →

Tags: hindi journlism, hindi epatrika, web duniya, web dunia, hindi nai duinia, Deepak bharatdeep, Deepak bapu, hindi bhasakar, hindi jagran

भर्तृहरि शतकः हंसों का मूल गुण परमात्मा भी नहीं छीन सकता

दीपक भारतदीप wrote 7 months ago: अम्भोजिनी वनविहार विलासमेव हंसस्य हंति नितरां कुपितो विधाता। न त्वस्य दुग्धवाभेदविधौ प्रसिद्धां वेंद … more →

Tags: अध्यात्म, jagran, adhyatm, Internet, India, धर्म, शब्द, Deepak bharatdeep, दीपक भारतदीप

बाजार की आस्था या आस्था का बाजार-हास्य व्यंग्य

दीपक भारतदीप wrote 7 months ago: कहीं न्यूजीलैंड में इस बात को लेकर लोग नाराज है कि ‘हनुमान जी पर कंप्यूटर गेम बना दिया गया है और बच् … more →

Tags: Hindi hasya, Hindi friends, hindi web, hindi epatrika, web duniya, web dunia, Deepak bharatdeep, Deepak bapu, hindi bhasakar

रहीम के दोहे: ख़ुशी के बदले ख़ुशी जरूर प्रदान करें

दीपक भारतदीप wrote 7 months ago: नाद रीझि तन देत मृग, नर धन हेत समेत ते रहीम पशु से अधिक, रीझेहु कछू न देत कविवर रहीम कहते हैं कि बां … more →

Tags: हिंदी, adhyatm, अध्यात्म, दोहे, धर्म, राम, हिंदी साहित्य, हिंदू, dharm

चाणक्य नीतिः धर्म परिवर्तन बनता है तनाव का कारण (chankya niti)

दीपक भारतदीप wrote 8 months ago: आत्मवर्ग परित्यन्य परवर्गे समाश्रितः। स्वयमेव लयं याति यथा राजात्यधर्मतः।। नीति विशारद चाणक्य कहते ह … more →

Tags: hindi Personal, Hindi Education, Hindi writing, Hindi Darshan, Hindu darshan, Hindu culture, hindu dharm, web duniya, Hindi vews

चाणक्य नीतिः अपने धर्म और भक्ति में बदलाव बनता है तनाव का कारण

दीपक भारतदीप wrote 8 months ago: नीति विशारद चाणक्य कहते हैं आत्मवर्ग परित्यन्य परवर्गे समाश्रितः। स्वयमेव लयं याति यथा राजात्यधर्मतः … more →

Tags: Hindi writing, Hindi Darshan, hindi megzine, chankya, hindi shabd, web dunia, shri Gita, hindi internet, Hindi Blogging

चाणक्य नीतिः अपने धर्म और भक्ति में बदलाव बनता है तनाव का कारण

दीपक भारतदीप wrote 8 months ago: नीति विशारद चाणक्य कहते हैं आत्मवर्ग परित्यन्य परवर्गे समाश्रितः। स्वयमेव लयं याति यथा राजात्यधर्मतः … more →

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जैसा आचरण राजा का वैसा ही प्रजा का2 comments

योगेन्द्र जोशी wrote 1 year ago: मैंने पहले कभी (31 अक्टूबर) महर्षि बाल्मीकिविरचित रामायण में उल्लिखित राम-जाबालि संवाद की चर्चा की थ … more →

Tags: नीति, लोकव्यवहार, संस्कृत-साहित्य, Morals, राजा, प्रजा, स्वेच्छाचार, ramayana

रामायण में राम-जाबालि संवाद

योगेन्द्र जोशी wrote 1 year ago: बाल्मीकिकृत रामायण में ऋषि जाबालि एवं श्रीराम के बीच एक संवाद का जिक्र है जो मुझे रोचक लगा । प्रसंग … more →

Tags: अध्यात्म, दर्शन, नीति, प्राचीन-भारत, आस्तिक, ईश्वरवाद, श्राद्ध, ramayana, Theism

श्री रामचरित मानस के सिद्ध मन्त्र 21 comments

aspundir wrote 1 year ago: श्री रामचरित मानस के सिद्ध ‘मन्त्र’ नियम- मानस के दोहे-चौपाईयों को सिद्ध करने का विधान य … more →

Tags: dharm, mantra, ram charit manas, Ramayan, रामचरित मानस, मंत्र, ramcharit manas

हाइकू-रामायण6 comments

प्रेमलता पांडे wrote 1 year ago: अयोध्या राज। चक्रवर्ती राजन। वृद्ध ह्वै जाएं।। कौशल राज, सुतविहीन हाय! भए उदास॥ कीन तपस्या, मिले ये … more →

Tags: हाइकू-रामायण, राम, हाइकू haiku, Rama


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