हम तो यूं अपनी ज़िंदगी से मिले, अजनबी जैसे अजनबी से मिले, हर वफ़ा एक जुर्म हो गया, दोस्त कुछ ऎसी बेरुखी से मिले, फूल ही फूल हमने मांगे थे, दाग ही दाग जिंदगी से मिले, जिस तरह आप हम से मिलते हैं, आदमी यूं… more →
कुछ पल जगजीत सिंह के नामदीपक भारतदीप wrote 7 months ago: वह स्वस्थ्य सुंदर युवक रामलीला मंडली में भगवान श्री राम की भूमिका निभाता था। इसी कारण लोग उसको राम ज … more →
Nidhi KM wrote 7 months ago: हर बार क्यों लक्षमण रेखा खिचाती है? हर बार क्यों अग्नि परीक्षा होती है? जब राम ही नही है आज यहाँ? फि … more →
Amarjeet Singh wrote 2 years ago: हम तो यूं अपनी ज़िंदगी से मिले, अजनबी जैसे अजनबी से मिले, हर वफ़ा एक जुर्म हो गया, दोस्त कुछ ऎसी बेरुख … more →