ना मंज़िलें न रास्ते न हमसफ़र है कोई बोलो इस से बड़ा किसी का सफ़र है कोई जिस सिम्त भी देखूँ नज़र आता है कोई और ही देखो आईना यहाँ क़द के बराबर है कोई कश्ती हर बदन की ड़ूबती मिट्टी में है ये ज़मीं है रब के या फ़… more →
इक शायर अंजाना सा...Rohit Jain wrote 1 year ago: ना मंज़िलें न रास्ते न हमसफ़र है कोई बोलो इस से बड़ा किसी का सफ़र है कोई जिस सिम्त भी देखूँ नज़र आता है क … more →
विनय wrote 1 year ago: आती-जाती रहती हैं यह सदियाँ रास्ते पर रहती हैं मेरी दो अँखियाँ तेरे इंतज़ार में तुझे देखने के लिए जान … more →
विनय wrote 1 year ago: किस राह को चल रहे थे किस राह को हम चल दिये, उनसे प्यार लिए हम चले इक नये सफ़र पर, लुटा दिया सारा जो क … more →
विनय wrote 1 year ago: मेरा माहताब जिसे देखा दिल हुआ बेताब मेरा मेरा मेरा मेरा माहताब जिसे देखा दिल हुआ बेताब जिसे देखा दिल … more →