मैं उससे मोहब्बत करता था आज भी करता हूँ काँच के दिल में जान भरता हूँ मेरे ख़ाबों में मेरे सपनों में उसकी ही चाहत है वह जो है मेरी ज़िन्दगी है मुझे चैन है राहत है मैं तन्हा था अकेला था आज उसके लिए जीता … more →
तख़लीक़-ए-नज़रविनय wrote 1 year ago: मैं उससे मोहब्बत करता था आज भी करता हूँ काँच के दिल में जान भरता हूँ मेरे ख़ाबों में मेरे सपनों में … more →
विनय wrote 1 year ago: दरिया किनारे वह लड़की बाल सँवारे क़दमों के निशाँ पर बहते हैं पानी के धारे दिल की ज़ुबाँ तो दीवाना दिल … more →