राहों में ढूँढ़ता हूँ कभी तुम मिलती नहीं यह भी सही जानो न जानो प्यार क्या है यह इक नशा-सा उतरता नहीं आँखों से पलकों पर भी चाहता है दिल यह, पास तुम रहो कोई तस्वीर जो आँखों में छुपाकर रखी थी समझता नहीं … more →
तख़लीक़-ए-नज़रविनय wrote 1 year ago: राहों में ढूँढ़ता हूँ कभी तुम मिलती नहीं यह भी सही जानो न जानो प्यार क्या है यह इक नशा-सा उतरता नहीं … more →