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अहम नाक़ाबिलियतों के बाबजू्द19 comments

रवि कुमार, रावतभाटा wrote 3 months ago: अहम नाक़ाबिलियतों के बाबजू्द (a poem by ravi kumar, rawatbhata) जो अपना ज़मीर नहीं मार सकते वे इस मौजू … more →

Tags: कविताएं, नाक़ाबिलियत, मुर्दा, रवि कुमार, वज़ूद, ज़मीर

शबनमी सर्द रात है और ख़्याल तेरा

विनय wrote 1 year ago: शबनमी सर्द रात है और ख़्याल तेरा चाँद तन्हा मैं तन्हा और ख़्याल तेरा सबसे छुपाया पर छुपा न राज़े-मोहब … more →

Tags: रुबाइयाँ, चाँद, इश्क़, दोस्त, Love, प्यार, मोहब्बत, रात, तन्हा

ज़हराब में बुझाते हैं तीर क्यूँ

विनय wrote 1 year ago: ज़हराब में बुझाते हैं तीर क्यूँ शिकार की अदा मैं भी जानता हूँ कितना मन मुकद्दर था उसका यह राज़े-निहाँ … more →

Tags: मेरी ग़ज़ल, Mind, शिकार, अदा, मन, निहाँ, Hidden, secret, Poison

आज हो या कल हो

विनय wrote 1 year ago: आज हो या कल हो हम आपको ही चाहेंगे कहता है जो कुछ मन उसको ही मानेंगे आज हो या कल हो हम आपको ही चाहेंग … more →

Tags: मेरा गीत, ख़ाब, चाँद, इश्क़, Love, क़रीब, दिल, प्यार, चेहरा

इस पल से उस पल तक

विनय wrote 1 year ago: इस पल से उस पल तक तुमको ही चाहेंगे कहता है जो कुछ दिल उसको ही मानेंगे इस पल से उस पल तक तुमको ही चाह … more →

Tags: मेरा गीत, ख़ाब, चाँद, इश्क़, Love, क़रीब, दिल, प्यार, चेहरा


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