बहुत पुराना है वह रिश्ता जिसे गठरी में बाँधकर रखा है मेहमान को बिठाया बाहर घर को किराये पर दे रखा है शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’ लेखन वर्ष: २००३… more →
तख़लीक़-ए-नज़रNidhi KM wrote 5 months ago: रिश्ता चुना था मैने, एक तेरा ही, इस दुनिया मे, अब उससे भी दूर होने का इरादा, तुमने जो जाता दिया, अच् … more →
Gayatri wrote 7 months ago: हर क़दम संभल के रखो हर हरफ़ वज़न कर कहो लाइफ में कोई यू- टर्न नही है ….. हर रिश्ता खुल के जियो … more →
विनय wrote 1 year ago: बहुत पुराना है वह रिश्ता जिसे गठरी में बाँधकर रखा है मेहमान को बिठाया बाहर घर को किराये पर दे रखा है … more →
विनय wrote 1 year ago: मतलब से ही जनम लेता है कोई रिश्ता मतलब से ही मिट जाता है वह रिश्ता तख़लीक़ के इस भँवर में तकलीफ़ है बह … more →
विनय wrote 1 year ago: वक़्त का पहना उतार आये कुछ लम्हे मरके गुज़ार आये ख़ाबों में सही अपना तो माना दिल को मेरे अपना तो जाना … more →
Amarjeet Singh wrote 1 year ago: रिमझिम रिमझिम वर्षा आई, देखो बरखा बाहर आई, हम भीगे तुम भीगे, भीग गया जग सारा, छोटी छोटी बूंदों मे, ब … more →
विनय wrote 1 year ago: मैं सबसे बुरा था सबसे बुरा हूँ सबसे बुरा ही रहूँगा मैं जी रहा था जी रहा हूँ ऐसे ही जीता रहूँगा उसने … more →
विनय wrote 1 year ago: और दाँव अपनी जाँ का किसने लगाया होगा फिर इश्क़ ने फ़रहाद कोई बुलाया होगा यूँ ही नहीं बिगड़ता है कोई कि … more →
विनय wrote 1 year ago: तुमको लौट के यहीं आना है (यहीं आना है) तुम मानो या न मानो मेरा दिल तेरा आशियाना है (आशियाना है) तुम … more →
विनय wrote 1 year ago: आती-जाती रहती हैं यह सदियाँ रास्ते पर रहती हैं मेरी दो अँखियाँ तेरे इंतज़ार में तुझे देखने के लिए जान … more →
विनय wrote 1 year ago: लगे लगन तो… छूटे नहीं यह… बने सजन तो… टूटे नहीं यह… बनता बन जाय, मिटता मिट ज … more →
विनय wrote 1 year ago: मेरा दर्द मेरा दु:ख मेरा अपना है बाक़ी सब झूठ है यह सच्चा सपना है कल तक लबों पर उसके लिए दुआ थी आज दु … more →
विनय wrote 1 year ago: ना लाओ ज़माने को तेरे-मेरे बीच दिल का रिश्ता है तेरे-मेरे बीच तंगिए-दिल से पहलू को छुटाओ गरज़ को न लाओ … more →
Hemant Patel wrote 2 years ago: कभी कभी रिश्ते बंधन बनकर रह जाते है.रिश्ते जो हमारे अपने होते है,जिन्के साथ हम अपना बचपन गुजारते है. … more →
विनय wrote 2 years ago: वो क्यों देखती है मुझे? उसे क्या चाहिए मुझसे? न रब्त कोई रखा मैंने उससे न ही उसने मुझसे फिर क्यों दे … more →
Gayatri wrote 2 years ago: “क्या मैं यहाँ बैठ सकता हूँ ?” ये शब्द सुनकर मेरा ध्यान उन की तरफ गया जों रेलवे प्लेटफार … more →