आज अगर तुम घर पर होती, तो घर को सर पर चढ़ा ली होती, भाई कि टांग खींच रही होती, काश के तुम आज घर पर होती। आज अगर तुम घर पर होती, पापा के इर्द गिर्द उछल रही होती, मम्मी से लाड प्यार कर रही होती, काश के त… more →
अभिजीत की कलमपवन कुमार स्वर्णकार wrote 3 months ago: रिश्ते बनतॆ हैं , बिगड़्ते हैं, सागर तट पर बने रेत के घरोंदों की तरह, और कुछ रिश्ते इतने घनिष्ठ, कि उ … more →
Maheep Saraf wrote 4 months ago: रिश्ते बहुत हैं इस संसार में, हर किसी को थोड़ा वक़्त चाहिए, मैं भी दुखी होता हूँ कभी कभी, मुझे भी कि … more →
Satish Chandra satyarthi wrote 8 months ago: सुदामा प्रसाद पाण्डेय “धूमिल” की एक और कविता आपके साथ शेयर करना चाहता हूँ। पता नहीं क्यो … more →
विनय wrote 1 year ago: कुछ रिश्ते होते हैं बच्चों की होम-वर्क डायरी की तरह हमने ग़म को पहना है दिल पर किसी ज़ेवर की तरह शायि … more →
abhijitc wrote 1 year ago: आज अगर तुम घर पर होती, तो घर को सर पर चढ़ा ली होती, भाई कि टांग खींच रही होती, काश के तुम आज घर पर हो … more →
kmuskan wrote 1 year ago: तु कया लूटेगा उन लूटे हूओ को जो पहले ही वकत के हाथो लूटे है । तोड़ सकी जिस ना मुश्किलें हजार आज वो अप … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: खुशबू जैसे सब रिश्ते हैं, जितना थामूं उड़ जाते हैं इन रस्तों में कुछ गड़बड़ है, उसकी जानिब मुड़ जाते हैं … more →
विनय wrote 1 year ago: मीठी-मीठी बातें वह शबनमी रातें सब याद हैं हमें वह रस्ते वह रिश्ते जो हमने क़ायम किये थे वादे जो हमने … more →
abhijitc wrote 2 years ago: जाने कब से तड़प रहा था । एक प्यारी-सी बहना के लिए ॥ बचपन से मुझे थी यह आस । की होगी एक लाडली बहना, मे … more →