इक पल मे कितना कुछ बदल जाता है पैसा कैसे सब रिश्तो को तोड़ देता है आज जान पाई हूँ पागल थी मैं जो इन रिश्तो को अपना मान बैठी थी पागल थी मैं जो इन पर अपना सब कुछ वार बैठी थी सोचती थी मेरे सुख दुःख के स… more →
कुछ िदल सेkmuskan wrote 1 year ago: इक पल मे कितना कुछ बदल जाता है पैसा कैसे सब रिश्तो को तोड़ देता है आज जान पाई हूँ पागल थी मैं जो इन र … more →