झोंके हवा के उसका रूख़सार चूमते हैं फूल उसकी आँखों को देख यार झूमते हैं तेरे हुस्नो-शबाब के बारे क्या कहूँ मैं तेरे आगे-पीछे दीवाने हज़ार घूमते हैं तेरी लटें उड़ती हैं किस अदा के साथ देखकर आशिक़ अपना नि… more →
तख़लीक़-ए-नज़रविनय wrote 11 months ago: झोंके हवा के उसका रूख़सार चूमते हैं फूल उसकी आँखों को देख यार झूमते हैं तेरे हुस्नो-शबाब के बारे क्य … more →
विनय wrote 2 years ago: तह पर तह लगी है कौन उतारेगा धूल पन्नों पर से आँधियों में… मैं खड़ा रहा साथ उसके न उसने मुझको द … more →