सहने दे ग़म थोड़ा – थोड़ा जो तुमने रुख़ मोड़ा-मोड़ा जान यह जाने दे ज़रा-ज़रा रहने दे आँखों को भरा-भरा सपने सारे मेरे टूटे जो साथी तुम मुझसे रूठे मरना गर मेरा वफ़ा हो तो मेरी जान क्यों ख़फ़ा हो आना त… more →
तख़लीक़-ए-नज़रविनय wrote 7 months ago: सहने दे ग़म थोड़ा – थोड़ा जो तुमने रुख़ मोड़ा-मोड़ा जान यह जाने दे ज़रा-ज़रा रहने दे आँखों को भर … more →