अकेले हम हों कभी, अकेले तुम हो और समन्दर का गुलाबी किनारा हो तन्हाई में हम हों रुसवाई में तुम हो तुमको मनाने का कोई बहाना हो कुछ तुम कहो फिर कुछ हम कहें दिल की धड़कनों का कहा दोनों सुनें चाहे लम्हे रु… more →
तख़लीक़-ए-नज़रविनय wrote 1 year ago: अकेले हम हों कभी, अकेले तुम हो और समन्दर का गुलाबी किनारा हो तन्हाई में हम हों रुसवाई में तुम हो तुम … more →