चाँद गवाह है मेरे प्यार का क्या यही ख़्याल है, मेरे यार का कुछ न ख़बर हुई उस पल की कुछ न पता चला उस पल का उसके चेहरे पर नज़र रुकी क्या ख़बर क्या गया, क्या मिला हर लम्हा इन्तज़ार नये ख़ाब का क्या ऐसा ही … more →
तख़लीक़-ए-नज़रविनय wrote 1 year ago: चाँद गवाह है मेरे प्यार का क्या यही ख़्याल है, मेरे यार का कुछ न ख़बर हुई उस पल की कुछ न पता चला उस … more →