रातभर चाँद देखा किये माज़ी में उड़ रहीं थीं तेरी यादें समेटा किये रातभर चाँद देखा किये कभी हाथ से ढका चाँद को कभी बादलों से उठाया भी गदेली पर रखकर उसे कभी होंटों तक लाया भी रातभर चाँद देखा किये माज़ी मे… more →
तख़लीक़-ए-नज़रविनय wrote 6 months ago: रातभर चाँद देखा किये माज़ी में उड़ रहीं थीं तेरी यादें समेटा किये रातभर चाँद देखा किये कभी हाथ से ढका … more →
विनय wrote 11 months ago: तुम जिस तरह से देखती हो मुस्कुराकर मुझे मेरी रूह भी पाकीज़गी का एहसास करती है, चलो यह बदशक़्ल आख़िरश प … more →
विनय wrote 1 year ago: मेरी हर नज़र बेक़रार’ और रूह बेताब है, लबों को भी न तस्लीम एक बूँद आब है रोज़-रोज़ की मुश्किली, यह … more →
विनय wrote 1 year ago: मेरा दीवाना दिल धड़कता है, तेरे लिए पल-पल चोरी-चोरी तड़पता है, तेरे लिए जीता है तेरे लिए, मरता है ते … more →
विनय wrote 1 year ago: दिल के दाग़ सभी ज़ख़्म हुए वह ख़फ़ा हुआ हम ख़त्म हुए कोसूँ क्या अपनी क़िस्मत को हमें भी कुछ नये इल्म हुए … more →