ऐ दिल वहाँ चल जहाँ रहते हैं वह उनके बिना कितने पल गुज़ारे हैं खोये-खोये सारे वह बीते नज़ारें हैं हाथों की लकीरों में उनका नाम है कहाँ मुझसे दूर खोये हुए हैं वह कुछ भी नहीं है उनकी यादों के सिवा किसी से … more →
तख़लीक़-ए-नज़रदीपक भारतदीप wrote 7 months ago: हरियाली के कायदे कभी रेगिस्तान में नहीं चलते। हरी दूब में चलते हों जो पांव रेत की धरती पर बुरी तरह ज … more →
Amarjeet Singh wrote 1 year ago: जुदाई की घड़ी आई, नजरो से नज़रे टकराई, आँखो से वो ओझल हुई, वो मेरी नजरो से ओझल हुई, रेगिस्तान मे वर् … more →
Amarjeet Singh wrote 1 year ago: ये कौन आया रेगिस्तान मे हरियाली सी छा गई, उसकी कातिल अदाएँ मेरे दिल-ओ-दिमाग पे छा गई, कही जोश-ऐ-जूनू … more →
विनय wrote 1 year ago: ऐ दिल वहाँ चल जहाँ रहते हैं वह उनके बिना कितने पल गुज़ारे हैं खोये-खोये सारे वह बीते नज़ारें हैं हाथों … more →
विनय wrote 1 year ago: वही हैं वह, वहीं हैं वह वही हैं वह, हाँ-वहीं हैं वह कल हमसे मिलीं थी जो हमने जब पूछा था उनसे वह हँसक … more →