विनय wrote 1 year ago: ना जीने को जी करता है ना मरने को जी करता है तू नहीं है जो साथ मेरे साथ रहने क … more →
विनय wrote 1 year ago: मेरी राहों की रेत पर उसके पैरों का निशाँ नहीं है वह गुज़रा नहीं इधर से पर मोहब्बत कम नहीं है आज़माना ह … more →
विनय wrote 1 year ago: दिल से मेरे जो पहली नज़्म निकली थी वह तेरे लिए थी सखी वह तेरे लिए थी तेरे मेरे ख़ाबों की ज़मीं पर सखी … more →
विनय wrote 1 year ago: तेरी यादों के, तेरे ख़ाबों के, साये तले हम कितनी दूर निकल आये, कहाँ चले तेरी यादों की धुँधली शाम … more →
विनय wrote 2 years ago: यह कौन-सा मुक़ाम है? जहाँ आकर सब चेहरे एक-से हो जाते हैं दिल रेत बनकर सीने में गहरा और गहरा धँसने लगत … more →