23 जनवरी को शाम को ऑफिस से निकलते-निकलते 7 बज गये. शाम को इस समय गुडगाँव के शंकर चौक पर जाम रोजमर्रा की समस्या है. यहाँ से निकले, तो धौला कुँआ में भी बुरी तरह ट्रैफिक जाम था. किसी तरह रावतुला राम मार्… more →
यह भी खूब रहीprithvi wrote 1 week ago: आज मैं कुछ कहना चाहता हूं. मेरी बात सुनकर कुछ लोग चौंकेंगे और शायद हंसेंगे भी कि महाभारत का कर्ण कैस … more →
रवि कुमार, रावतभाटा wrote 4 months ago: चाहे मुझे पागल करार दिया जाए (a poem by ravi kumar, rawatbhata) कोई यदि पूछेगा सबसे बेहतर रंग कौनसा … more →
रवि कुमार, रावतभाटा wrote 8 months ago: मैं ख़ुदाओं के बीच सो रहा (a poem by ravi kumar, rawatbhata) उसने मुझसे ख़ुदा के नूर के बारे में पूछा … more →
विजय सारस्वत wrote 9 months ago: गिरती महंगाई दर में बेशकीमती हुई रोटी नई दिल्ली। सप्ताह दर सप्ताह कम हो रही मुद्रास्फीति के बावजूद आ … more →
pryas wrote 10 months ago: 23 जनवरी को शाम को ऑफिस से निकलते-निकलते 7 बज गये. शाम को इस समय गुडगाँव के शंकर चौक पर जाम रोजमर्रा … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: अपने शहर पर इतना नहीं इतराओ कि फिर पराये लगने लगें लोग सभी कभी यह गांव जितना छोटा था तब न तुम थे यहा … more →
pryas wrote 1 year ago: बहुत पुरानी बात है। एक राजा था। उसके पास एक दिन एक संत आए। उन्होंने कई विषयों पर चर्चा की। राजा और स … more →