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Blogs about: रोहित

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वो बहुत याद आए भुलाने के बाद7 comments

Rohit Jain wrote 1 month ago: वो बहुत याद आए भुलाने के बाद आग बुझती नहीं है ज़माने के बाद और इस से बड़ी कोई मुश्किल नहीं ज़िंदगी ब … more →

Tags: 2009 A Poetic Journey, मेरी गज़लें, Sep, 2009, 2009, आए, कविता, के, गज़ल, जैन

बदले बदले3 comments

Rohit Jain wrote 3 months ago: जारी हैं क़त्ल अब भी बस सर हैं बदले बदले हैं आज भी वो क़ातिल खंजर हैं बदले बदले इल्ज़ाम हैं लगाते के … more →

Tags: 2007 A Poetic Journey, मेरी गज़लें, Oct 2007, 2007, कविता, गज़ल, जैन, बदले, jain

किसने बोला क़ज़ा से ड़रते हैं 4 comments

Rohit Jain wrote 3 months ago: किसने बोला क़ज़ा से ड़रते हैं हम तो तेरी वफ़ा से ड़रते हैं दुश्मनों का तो हम को ड़र ही नहीं दोस्तों … more →

Tags: 2009 A Poetic Journey, Aug, 2009, मेरी गज़लें, 2009, Aug., August, कविता, क़ज़ा, किसने

यूँ इश्क़ का हमने दिया है इम्तिहां अक़्सर2 comments

Rohit Jain wrote 3 months ago: यूँ इश्क़ का हमने दिया है इम्तिहां अक़्सर मुँह में ज़ुबां होते हुए थे बेज़ुबां अक़्सर इश्क़ की तासीर … more →

Tags: 2007 A Poetic Journey, मेरी गज़लें, Oct 2007, 2007, अक़्सर, इम्तिहां, इश्क़, कविता, का

कोई सूरज हमारी ताक में है5 comments

Rohit Jain wrote 9 months ago: पसेज़ुल्मत कोई सूरज हमारी ताक में है इसी उम्मीद का दम अब हमारी ख़ाक में है नहीं है ख़ौफ़ किसी ज़ुल्म का ह … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2008 A Poetic Journey, Nov 2008, में, जैन, Rohit, jain, 2008, है

आ तेरे प्यार में तामीर करूँ ताजमहल7 comments

Rohit Jain wrote 10 months ago: मै बनूं शाहजहां तू मेरी मुमताज़ महल आ तेरे प्यार में तामीर करूँ ताजमहल तू ही उर्दू का अदब और तू ही श … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2008 A Poetic Journey, DEC 2008, में, जैन, कविता, Rohit, jain, 2008

मोहब्बत में1 comment

Rohit Jain wrote 11 months ago: कुछ ऐसे इश्क़ का धोखा मिँया खाया मोहब्बत में पराया जुर्म अपने नाम लिखवाया मोहब्बत में ये मेरा पैर मेर … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2008 A Poetic Journey, Nov 2008, में, जैन, गज़ल, कविता, Rohit, jain

दास्तां लिख रहा हूँ पानी पर5 comments

Rohit Jain wrote 11 months ago: हार जाने की कामरानी पर                दास्तां लिख रहा हूँ पानी पर आपने दिल मेरा जो तोड़ा है शुक्र करत … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2008 A Poetic Journey, Nov 2008, जैन, गज़ल, कविता, Rohit, jain, 2008

शायद4 comments

Rohit Jain wrote 12 months ago: हमारी इब्तेदा ही है हमारी इंतेहा शायद मुसीबत में भी अब आने लगा हमको मज़ा शायद मोहब्बत बन गई है जान-ओ- … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2008 A Poetic Journey, Oct 2008, जैन, गज़ल, कविता, Rohit, jain, 2008

सोज़ेदिल में कभी कमी ना हो2 comments

Rohit Jain wrote 12 months ago: सोज़ेदिल में कभी कमी ना हो ज़िंदगी चाहे ज़िंदगी ना हो वो मुझे देखते हैं कुछ ऐसे उनकी आँखों में गो नमी न … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2008 A Poetic Journey, Nov 2008, में, हो, जैन, गज़ल, कविता, Rohit

मै दिल की दीवारों से निकल आया हूँ7 comments

Rohit Jain wrote 1 year ago: मै दिल की दीवारों से निकल आया हूँ मै ग़म के नज़ारों से निकल आया हूँ मुजरिमों कि क़तारों से निकल आया हूँ … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2008 A Poetic Journey, Oct 2008, की, जैन, गज़ल, कविता, Rohit, jain

सिलसिला गुनाह का1 comment

Rohit Jain wrote 1 year ago: ज़िंदगी है इक मुसलसल सिलसिला गुनाह का आपको दिखता नहीं तो ऐब है निगाह का आजकल के दौर की मिसाल है ये ता … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2008 A Poetic Journey, Sep 2008, जैन, गज़ल, कविता, Rohit, jain, 2008

आप भी अजीब हैं3 comments

Rohit Jain wrote 1 year ago: आप भी अजीब हैं क्यूँ मेरे करीब हैं देते हैं दवा में ज़हर ये मेरे तबीब हैं                  तबीब == He … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2008 A Poetic Journey, Sep 2008, जैन, गज़ल, कविता, Rohit, jain, 2008

देख लूँ3 comments

Rohit Jain wrote 1 year ago: कुछ गिरा है, मै यहां पर क्या गिरा है देख लूँ है लहू किसका ये उसका या मिरा है देख लूँ मै नहीं जाता था … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2008 A Poetic Journey, Feb 2008, जैन, गज़ल, कविता, Rohit, jain, 2008

तुम भी5 comments

Rohit Jain wrote 1 year ago: दिल जो टूटा तो बताओ के किधर जाओगे तुम भी इस राह में आखिर को बिखर जाओगे हद से हद ये ही मिलेगा मुझे चा … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2008 A Poetic Journey, Sep 2008, जैन, गज़ल, कविता, Rohit, jain, 2008

यादें बिन आये भी जब6 comments

Rohit Jain wrote 1 year ago: यादें बिन आये भी जब सीने में जलने लगती हैं तस्वीरें रंग बदलती हैं तन्हाई में बोलने लगती हैं तारीकी ऐ … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2008 A Poetic Journey, Sep 2008, जैन, गज़ल, कविता, Rohit, jain, 2008

क्या क्या6 comments

Rohit Jain wrote 1 year ago: कौन ये कश्ती ले उतरा तूफ़ान में इतना दम कब से आया इन्सान में वो देखता रह्ता है आसमां की तरफ़ कोई रहता … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2008 A Poetic Journey, Sep 2008, जैन, गज़ल, कविता, Rohit, jain, 2008

मिजाज़ेज़िंदगी है काफ़िराना3 comments

Rohit Jain wrote 1 year ago: मिजाज़ेज़िंदगी है काफ़िराना कभी बातों में इसकी तुम न आना कभी होता था मै भी आशिक़ाना हुआ क्या के हुआ सब म … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2008 A Poetic Journey, Aug 2008, जैन, गज़ल, कविता, Rohit, jain, 2008

चेहरों पे चेहरा8 comments

Rohit Jain wrote 1 year ago: सेहर है या कोई सहरा है लोगों सभी बातों पे क्यों पहरा है लोगों जहां कश्ती मेरी आकर रुकी है समन्दर और … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2008 A Poetic Journey, Aug 2008, जैन, गज़ल, कविता, Rohit, jain, 2008


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