वो बहुत याद आए भुलाने के बाद आग बुझती नहीं है ज़माने के बाद और इस से बड़ी कोई मुश्किल नहीं ज़िंदगी बढ़ गई ज़हर खाने के बाद इतना अंधा किया फ़ुरक़ते यार ने दिल जलाना पड़ा उसके जाने के बाद हुआ हाल ऐसा मे… more →
इक शायर अंजाना सा...Rohit Jain wrote 1 month ago: वो बहुत याद आए भुलाने के बाद आग बुझती नहीं है ज़माने के बाद और इस से बड़ी कोई मुश्किल नहीं ज़िंदगी ब … more →
Rohit Jain wrote 3 months ago: जारी हैं क़त्ल अब भी बस सर हैं बदले बदले हैं आज भी वो क़ातिल खंजर हैं बदले बदले इल्ज़ाम हैं लगाते के … more →
Rohit Jain wrote 3 months ago: किसने बोला क़ज़ा से ड़रते हैं हम तो तेरी वफ़ा से ड़रते हैं दुश्मनों का तो हम को ड़र ही नहीं दोस्तों … more →
Rohit Jain wrote 3 months ago: यूँ इश्क़ का हमने दिया है इम्तिहां अक़्सर मुँह में ज़ुबां होते हुए थे बेज़ुबां अक़्सर इश्क़ की तासीर … more →
Rohit Jain wrote 9 months ago: पसेज़ुल्मत कोई सूरज हमारी ताक में है इसी उम्मीद का दम अब हमारी ख़ाक में है नहीं है ख़ौफ़ किसी ज़ुल्म का ह … more →
Rohit Jain wrote 10 months ago: मै बनूं शाहजहां तू मेरी मुमताज़ महल आ तेरे प्यार में तामीर करूँ ताजमहल तू ही उर्दू का अदब और तू ही श … more →
Rohit Jain wrote 11 months ago: कुछ ऐसे इश्क़ का धोखा मिँया खाया मोहब्बत में पराया जुर्म अपने नाम लिखवाया मोहब्बत में ये मेरा पैर मेर … more →
Rohit Jain wrote 11 months ago: हार जाने की कामरानी पर दास्तां लिख रहा हूँ पानी पर आपने दिल मेरा जो तोड़ा है शुक्र करत … more →
Rohit Jain wrote 12 months ago: हमारी इब्तेदा ही है हमारी इंतेहा शायद मुसीबत में भी अब आने लगा हमको मज़ा शायद मोहब्बत बन गई है जान-ओ- … more →
Rohit Jain wrote 12 months ago: सोज़ेदिल में कभी कमी ना हो ज़िंदगी चाहे ज़िंदगी ना हो वो मुझे देखते हैं कुछ ऐसे उनकी आँखों में गो नमी न … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: मै दिल की दीवारों से निकल आया हूँ मै ग़म के नज़ारों से निकल आया हूँ मुजरिमों कि क़तारों से निकल आया हूँ … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: ज़िंदगी है इक मुसलसल सिलसिला गुनाह का आपको दिखता नहीं तो ऐब है निगाह का आजकल के दौर की मिसाल है ये ता … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: आप भी अजीब हैं क्यूँ मेरे करीब हैं देते हैं दवा में ज़हर ये मेरे तबीब हैं तबीब == He … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: कुछ गिरा है, मै यहां पर क्या गिरा है देख लूँ है लहू किसका ये उसका या मिरा है देख लूँ मै नहीं जाता था … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: दिल जो टूटा तो बताओ के किधर जाओगे तुम भी इस राह में आखिर को बिखर जाओगे हद से हद ये ही मिलेगा मुझे चा … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: यादें बिन आये भी जब सीने में जलने लगती हैं तस्वीरें रंग बदलती हैं तन्हाई में बोलने लगती हैं तारीकी ऐ … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: कौन ये कश्ती ले उतरा तूफ़ान में इतना दम कब से आया इन्सान में वो देखता रह्ता है आसमां की तरफ़ कोई रहता … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: मिजाज़ेज़िंदगी है काफ़िराना कभी बातों में इसकी तुम न आना कभी होता था मै भी आशिक़ाना हुआ क्या के हुआ सब म … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: सेहर है या कोई सहरा है लोगों सभी बातों पे क्यों पहरा है लोगों जहां कश्ती मेरी आकर रुकी है समन्दर और … more →