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Blogs about: रोज़

रोज़ ही होता है5 comments

विनय wrote 1 year ago: रोज़ ही होता है होंठों तक बात आते-आते रह जाती है मेरी इक कमी तेरे रू-ब-रू मुझे लब खोलने नहीं देती कित … more →

Tags: मेरी त्रिवेणी, बात, Guilty, लब, कमी, मुश्किल, होंठ, Lips, HARD

मेरी हर नज़र4 comments

विनय wrote 1 year ago: मेरी हर नज़र बेक़रार’ और रूह बेताब है, लबों को भी न तस्लीम एक बूँद आब है रोज़-रोज़ की मुश्किली, यह … more →

Tags: मेरी त्रिवेणी, बूँद, बेताब, Curse, नज़र, soul, लब, Lips, Day

रोज़ सपनों में आता है

विनय wrote 1 year ago: रोज़ सपनों में आता है इन रातों में जगाता है मैं क्यों न जानूँ उसको मैं न पहचानूँ उसको वह मुझसे अजनबी … more →

Tags: मेरा गीत, इश्क़, Love, प्यार, चेहरा, मोहब्बत, रात, चाँदनी, नशा

यह सिलसिला यूँ ही थमा रहेगा

विनय wrote 2 years ago: रोज़, यह बुझता नहीं शब, यह गलती नहीं बिन तेरे सब कुछ थम के रह गया है *दिन में रोशनी होती है, इसलिए … more →

Tags: मेरी नज़्म, इश्क़, Love, light, Reminisce, प्यार, याद, रोशनी, मोहब्बत


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