वो तस्कीं न मेरे दर पे माथा टेके न ही रौज़न से झाँके सिर्फ़ - खा़बों को बे-रब्त किए घूमती है हर गली हर कूचे में मशहूर हैं, उसकी वफ़ा के क़िस्से मगर अब कि वाक़िया हमारा मशहूर होगा शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’… more →
तख़लीक़-ए-नज़रविनय wrote 2 years ago: वो तस्कीं न मेरे दर पे माथा टेके न ही रौज़न से झाँके सिर्फ़ - खा़बों को बे-रब्त किए घूमती है हर गली हर … more →