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Blogs about: रक़ीब

और कैसे रक़ीब के यार हमसे पेश आते

विनय wrote 1 year ago: और कैसे रक़ीब के यार हमसे पेश आते वह हमसे अय्यारी नहीं तो और क्या फ़रमाते हमारी क़िस्मत में जीते-जी फ़ना … more →

Tags: मेरी ग़ज़ल, अय्यारी, इश्क़, ख़ुदा, दिल, दुश्मन, दोस्त, प्यार, मतलब

पैमाने दर्द के रोज़ छलका करते हैं

विनय wrote 1 year ago: नहीं कोई दोस्त मेरा न सही रक़ीबों से मिल के दिल हल्का करते हैं सैलाबे-क़लक़ चढ़ता जाता है पैमाने दर्द क … more →

Tags: रुबाइयाँ, इश्क़, दोस्त, क़लक़, दर्द, Love, प्यार, मोहब्बत, Pain


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