वक़्त का पहना उतार आये कुछ लम्हे मरके गुज़ार आये ख़ाबों में सही अपना तो माना दिल को मेरे अपना तो जाना खट्टे-मीठे रिश्ते चख लिये हैं कुछ सच्चे पलकों पे रख लिये हैं ख़ाहिशों का बवण्डर है दिल दिल को उसके द… more →
तख़लीक़-ए-नज़रविनय wrote 1 year ago: वक़्त का पहना उतार आये कुछ लम्हे मरके गुज़ार आये ख़ाबों में सही अपना तो माना दिल को मेरे अपना तो जाना … more →