कैसा सजा है आज ये बाज़ार देख तो इन्सान ही इन्सां का खरीदार देख तो कैसा लगा है आज ये दरबार देख तो मुंसिफ़ ही क़ातिलों में है शुमार देख तो हर शख़्स ही यहां ज़ेरेदीवार देख तो सूरज की रोशनी से ये क़रार देख तो य… more →
इक शायर अंजाना सा...Rohit Jain wrote 1 year ago: कैसा सजा है आज ये बाज़ार देख तो इन्सान ही इन्सां का खरीदार देख तो कैसा लगा है आज ये दरबार देख तो मुंस … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: दुख के चेहरे पर लकीरें याद की सुन रहा हूं सदा दिलेबरबाद की तेरी महफ़िल तेरा परचम ओ’ हुजूम अब कि … more →