Blogs about: लकीर
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तुम मेरे हो
तुम मेरे हो, मेरे ही मेरे हो कितनी हों दूरियाँ, कितने हों फ़ासले तुम मेरे हो, तु… more »
तख़लीक़-ए-नज़र
तुम मेरे हो
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विनय प्रजापति wrote 1 month ago: तुम मेरे हो, मेरे ही मेरे हो कितनी हों द … more »
तुम मेरे हो
विनय प्रजापति wrote 2 months ago: तुम मेरे हो तुम मेरे हो तुम मेरे हो दिल … more »
ऐ दिल वहाँ चल जहाँ रहते हैं वह
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विनय प्रजापति wrote 3 months ago: ऐ दिल वहाँ चल जहाँ रहते हैं वह उनके बिन … more »
भजन करते-करते भक्त हो जायेंगे-हास्य क्षणिकाएँ
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दीपक भारतदीप wrote 3 months ago: निजी अस्पतालों के बाहर लिखा रहता है … more »
आध्यात्मिक ज्ञान के बिना विकास अधूरा
दीपक भारतदीप wrote 7 months ago: देश को विकास की ओर ले जाने की बात … more »
कौटिल्य अर्थशास्त्र:राजप्रमुख अपने पुत्रों पर दृष्टि रखें
दीपक भारतदीप wrote 7 months ago: मदोन्मत्त हुए राजप्रमुख (राजा) के पु … more »
शाश्वत सत्य के रुप हैं राम
दीपक भारतदीप wrote 7 months ago: राम हैं एक काल्पनिक पात्र है आ रहे रोज … more »
आंकडो के जाल में मत आओ, तुम लिखते जाओ
दीपक भारतदीप wrote 8 months ago: अपनी हिन्दी भाषा में लिखते जाओ कतरनो … more »
अपनी भाषा के लिये किसी का मोहताज न होना
दीपक भारतदीप wrote 8 months ago: हिन्दी दिवस पर कई लोग बोले हिन्दी की द … more »
मेकअप की माया
दीपक भारतदीप wrote 8 months ago: निर्देशक ने कहा हीरोइन से ‘अपना मु … more »
सचिव हो तो ऐसा
दीपक भारतदीप wrote 8 months ago: वर्षा का मौसम आते ही मदद करने वाल … more »
शेर ने कहा लोमड से-"यहां मानवतावाद मत फैला"
दीपक भारतदीप wrote 8 months ago: शेर की गुफा में वह मृग का बच्चा शुरू से … more »
गंदगी के ढेर भी काम आते हैं
दीपक भारतदीप wrote 9 months ago: शहर में गंदगी के ढेर देखकर अंग्रेज प … more »
वर्षा ऋतु:कहीं सूखा कहीं बाढ़
दीपक भारतदीप wrote 9 months ago: वर्षा ऋतु का वर्णन किताबों में पढ़ते … more »
छोटी लकीर-बडी लकीर
दीपक भारतदीप wrote 9 months ago: दूसरे की निन्दा कर अपने लिये सम्मान … more »
