आप से विदा लेने के बाद जब मैं इस गड्ढे के पास पहुँचा तो उसमें से झाँकते वाल्व को देख कर मुझे अपने अनुमान पर गर्व हुआ। वह तीसरे प्रकार का ही गड्ढा था। थोड़ी दूर पर सीवर का बजबजाता पानी नाली में देख कर … more →
एक आलसी का चिठ्ठाGirijesh Rao wrote 1 month ago: आप से विदा लेने के बाद जब मैं इस गड्ढे के पास पहुँचा तो उसमें से झाँकते वाल्व को देख कर मुझे अपने अन … more →
Girijesh Rao wrote 1 month ago: (अ) भूमिका: भारतीय नगरीय परिप्रेक्ष्य में गढ्ढे कइ प्रकार के होते हैं: नई कॉलोनियों में कूडा फेंकन … more →
विनय wrote 1 year ago: आदाब तुझे ऐ मेरे वतन लखनऊ आदाब तुझे मेरे जानो-तन लखनऊ है कभी आईना कभी शराब-सा तू है मेरी शोख़ी मेरा … more →