दिल लगा बहार में, हाथ में आई खिज़ां इश्क़-ए-ख़ुदा की आस थी हो गया इश्क़-ए-बुतां इक वक़्त था के हर तरफ़ अपना ही वुजूद थ हाया इश्क़ क्या किया मिट गये नाम-ओ-निशां उफ़ वो जलवे हुस्न के उफ़ वो साये ज़ुल्फ़ के मुँह मे… more →
इक शायर अंजाना सा...Rohit Jain wrote 1 year ago: दिल लगा बहार में, हाथ में आई खिज़ां इश्क़-ए-ख़ुदा की आस थी हो गया इश्क़-ए-बुतां इक वक़्त था के हर तरफ़ अपन … more →