इक जाम-ए-जुनूं को लबों से लगाया है दिल को इक नये ग़म का नशा कराया है ये कैसी हलचल… more →
Rohit Jain wrote 6 months ago: इक जाम-ए-जुनूं को लबों से लगाया है दिल क … more →
Tags: मेरी गज़लें, 2007 A Poetic Journey, Dec 2007, 2007, इक, कविता, को, गज़ल, जाम
Follow this tag via RSS