विनय प्रजापति wrote 6 months ago: तुझे देखा तू ही मेरी हमनशीं तुझे चाहा … more →
विनय प्रजापति wrote 6 months ago: अकेले हम हों कभी, अकेले तुम हो और समन्द … more →
विनय प्रजापति wrote 6 months ago: यह यादें तो ऐसी हैं जैसे मेरी परछाईं ज … more →
दीपक भारतदीप wrote 11 months ago: 1. हजारों गायों की बीच जिस तरह बछड़ा अ … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: हीरो और क्लर्क ऐक ही दिन और ऐक ही समय प … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: नये लेखक जिन्होंने अभी हाल ही में इंट … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: (यह व्यंग्य कविता काल्पनिक हैं और कि … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: अपनी-अपनी सब कहैं सुने न कोई किसी की बा … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: बौद्धिक अँधेरे में ज्ञान के चिराग कुछ … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: जब तुम बदलाव के लिए आगे बढते जाओगे भीड … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: बौद्धिक अँधेरे में ज्ञान के चिराग कुछ … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: (यह व्यंग्य कविता काल्पनिक है और इसका … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: नये लेखक जिन्होंने अभी हाल ही में इंटर … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: न पीडा से न किसी चाहत से न किसी शब्द से … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: क्रिकेट,फिल्म,राजनीति और और पत्रकारि … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: अपनी इच्छाओं और आशाओं की स … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: हमारे देश के अनेक महापुरुष कह चुके है … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: सीमेंट और कंक्रीट से बने बुतों को हसर … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: जिनके दिमाग के हैं तंग … more →