Blogs about: लम्हे

Featured Blog

आँखों की ख़ुशबू को छुआ नहीं महसूस किया जाता है5 comments

विनय wrote 2 months ago: आँखों की ख़ुशबू को छुआ नहीं महसूस किया जाता है दिल को बहलावा नहीं दर्द दिया जाता है दर्द जो है इश्क़ … more →

Tags: मेरा गीत, आँखें, इश्क़, ख़ुदा, ख़ुशबू, जनम, तन्हाई, दर्द, दूरी

सहने दे ग़म थोड़ा-थोड़ा8 comments

विनय wrote 7 months ago: सहने दे ग़म थोड़ा – थोड़ा जो तुमने रुख़ मोड़ा-मोड़ा जान यह जाने दे ज़रा-ज़रा रहने दे आँखों को भर … more →

Tags: मेरा गीत, angry, आँखें, इन्तिज़ार, ख़ला, ख़ाब, ख़फ़ा, ग़म, ग़ुम

जब पतझड़ के मौसम आते हैं

विनय wrote 1 year ago: तुझे देखा तू ही मेरी हमनशीं तुझे चाहा तू ही मेरी जान-सी तुझे देखा मैंने तुझे चाहा तुझे सिर्फ़ तू ही म … more →

Tags: मेरा गीत, अँधेरे, आशिक़, उजाले, ख़्याल, गुच्छे, गुल, जान-सी, दिए

अकेले हम हों कभी

विनय wrote 1 year ago: अकेले हम हों कभी, अकेले तुम हो और समन्दर का गुलाबी किनारा हो तन्हाई में हम हों रुसवाई में तुम हो तुम … more →

Tags: मेरा गीत, इश्क़, Love, तन्हाई, दिल, प्यार, मोहब्बत, चाहत, वफ़ा

यह यादें तो ऐसी हैं

विनय wrote 1 year ago: यह यादें तो ऐसी हैं जैसे मेरी परछाईं जब तक अंधेरे में चलते रहे तब तक हम दोनों साथ नहीं जहाँ उजालों क … more →

Tags: मेरा गीत, Affection, आकाश, इश्क़, कहानियाँ, काग़ज़, घट, चाँद, दिल

चाणक्य नीति:अन्न,जल और प्रिय वचन हैं असली रत्न 1 comment

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: 1. हजारों गायों की बीच जिस तरह बछड़ा अपनी मा के पास जाता है वैसे ही मनुष्य का कर्म भी उसी में … more →

Tags: hindi, Global Dashboard, inglish, विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, India, bharat, चिन्तन

हीरो और क्लर्क-hasya vyangaya kavita

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: हीरो और क्लर्क ऐक ही दिन  और ऐक ही समय पर  मंदिर में करने  दर्शन करने पहुँचे  क्लर्क तो रोज वहाँ जाक … more →

Tags: अभिव्यक्ति, इंडिया, कविता, क्षणिका, गीत, चिन्तन, ताल-बेताल, प्रतिबिंब, बिंब-प्रतिबिंब

नए और फ्लॉप लेखक हिट्स से विचलित न हौं

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: नये लेखक जिन्होंने अभी हाल ही में इंटर नेट पर लिखना शुरू किया है और जो पहले से ही लिख रहे हैं और म … more →

Tags: Art, ताल-बेताल, नज़रिया, प्रतिबिंब, बिंब-प्रतिबिंब, रात-बेरात, व्यंग्य, हास्य व्यंग्य, हिंदी साहित्य

लड़ते रहो, हमें किसी तरह हिट होना है

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago:   (यह व्यंग्य कविता काल्पनिक हैं और किसी घटना या व्यक्ति से इसका कोई संबंध नहीं है) लड़ते रहो दोस्त … more →

Tags: apne lamhe, arebic, कविता, गीत, चिन्तन, ताल-बेताल, दीपक द्वारा, दृष्टिकोण, प्रतिबिंब

मन के बहरों के आगे क्या बीन बजाना-hasya kavita

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: अपनी-अपनी सब कहैं सुने न कोई किसी की बात इससे तो अच्छा हैं हम मौन हो जाये अपने ही मन की सुने बात … more →

Tags: कविता, दर्द बांटते चलो, दीपक भारतदीप, बिंब-प्रतिबिंब, व्यंग्य, शायरी, संवेदना, साहित्य, हिंदी साहित्य

ज्ञान के चिराग कुछ यूँ बेचे जा रहे हैं

दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: बौद्धिक अँधेरे में ज्ञान के चिराग कुछ यूँ बेचे जा रहे हैं सदियों से अपनी जगह खडे बुत भी लोगों को चल … more →

Tags: Blogroll, Vichar, hindi, Kavita, दृष्टिकोण, Global Dashboard, शेर-ओ-शायरी, कविता, दर्द बांटते चलो

तब भी अकेले नजर आओगे

दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: जब तुम बदलाव के लिए आगे बढते जाओगे भीड़ से अलग होकर अकेले नजर आओगे बदलाव की हवा के झोंके से भी लोग … more →

Tags: hindi, हिन्दी, Kavita, Thought, inglish, हिंदी, विचार, कविता, दृष्टिकोण

सदियों से खडे बुत चलते नजर आ रहे हैं

दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: बौद्धिक अँधेरे में ज्ञान के चिराग कुछ यूँ बेचे जा रहे हैं सदियों से अपनी जगह खडे बुत भी लोगों को चल … more →

Tags: hindi, writing, हिन्दी, vyangya, Kavita, inglish, क्षनिअका, कविता, दृष्टिकोण

आईने में बदहवास दीपक बापू

दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: (यह व्यंग्य कविता काल्पनिक है और इसका किसी घटना या व्यक्ति से कोई संबंध नहीं है) अपने आईने में हमार … more →

Tags: Blogroll, Vichar, hindi, sampadkeeya, दृष्टिकोण, Global Dashboard, शेर-ओ-शायरी, कविता, inglish

नए और फ्लॉप लेखक हिट्स से विचलित न हौं

दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: नये लेखक जिन्होंने अभी हाल ही में इंटर नेट पर लिखना शुरू किया है और जो पहले से ही लिख रहे हैं और मेर … more →

Tags: Blogroll, हिन्दी, Dashboard, Global Dashboard, vyangya, anugoonj, Thought, sanskrati, vividha

शाश्वत प्रेम पर एक कविता-hasya kavita

दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: न पीडा से न किसी चाहत से न किसी शब्द से वह बहता आता है सहज भाव से अपनी पीडाओं को भुला दो अपनी चाहतों … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, कविता, गीत, चरित्र, ताल-बेताल, दृष्टिकोण, प्रतिबिंब, बिंब-प्रतिबिंब

हर चमकने वाली चीज हीरा नहीं होती

दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: क्रिकेट,फिल्म,राजनीति और और पत्रकारिता का क्षेत्र समाज में आकर्षण का केंद्र होते हैं । यही नहीं जिन … more →

Tags: Blogroll, Kavita, sampadkeeya, दृष्टिकोण, Global Dashboard, कविता, दर्द बांटते चलो, inglish, नज़रिया

चिन्तन और ज्ञान

दीपक भारतदीप wrote 2 years ago:                 अपनी इच्छाओं और आशाओं की सतत पूर्ती को ही मनुष्य वास्तविक सुख समझता है -उसे लगता है … more →

Tags: anugoonj, अनुगूँज, अनुभूति, अभिव्यक्ति, आचरण, आध्यात्म, आलेख, आस्था, इंडिया

पैसा और सुख -एक सस्मरण

दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: हमारे देश के अनेक महापुरुष कह चुके हैं कि जीवन अपने आप में एक मृग तृष्णा है । और ऐसा नहीं है कि हमा … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, आचरण, इंडिया, कविता, गीत, चरित्र, चिन्तन, दृष्टिकोण


Have your say. Start a blog.

See our free features →

Related Tags
All →

Follow this tag via RSS

Find other items tagged with “लम्हे”:
Technorati Del.icio.us IceRocket