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Blogs about: लहू

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पानी के बेहने को अश्क़ नहीं कहते

palakmathur wrote 5 months ago: दर्द कितना है दिल में न जान पाओगे, हम रोज़ अपने ग़म का इश्तेहार नहीं करते, जो आँख से टपकें लहू तो बत … more →

Tags: आत्मीयता, हिन्दी, hindi, Poem, Poems, दर्द, अश्क़, Ashq, Dard

यह सोज़गाह है कि मेरा दिल है8 comments

विनय wrote 9 months ago: यह सोज़गाह1 है कि मेरा दिल है मुझको जलाने वाला मेरा क़ातिल है जिसे देखकर उसे रश्क़2 आता है वह कोई और नह … more →

Tags: मेरी ग़ज़ल, हासिल, Heart, दिल, शामिल, दुनिया, क़ातिल, World, include

इश्क़ क्या हमको मारेगा4 comments

विनय wrote 1 year ago: इश्क़ क्या हमको मारेगा, हम इश्क़ को मारेंगे अब तलक क्या हारे हैं उससे, जो अब हारेंगे जाओ कह दो शायरे-म … more →

Tags: रुबाइयाँ, इश्क़, Love, प्यार, मोहब्ब्त, Defeat, Poem, Blood+, Competitor

मैंने आँखों को लहू का समन्दर

विनय wrote 1 year ago: मैंने आँखों को लहू का समन्दर और दिल को दस्तो-सहरा बनाया ‘नज़र’ को अय्यार पेश सैय्याद बता … more →

Tags: रुबाइयाँ, Heart, दिल, समन्दर, सज़ा, Sea, desert, Blood+, Jungle

आदाब तुझे ऐ मेरे वतन लखनऊ

विनय wrote 1 year ago: आदाब तुझे ऐ मेरे वतन लखनऊ आदाब तुझे मेरे जानो-तन लखनऊ है कभी आईना कभी शराब-सा तू है मेरी शोख़ी मेरा … more →

Tags: मेरी ग़ज़ल, Heaven, Fragrance, गुलशन, dido, जन्नत, habit, आदाब, Salute

वो जिसे इश्क़ कहता था

विनय wrote 1 year ago: वो जिसे इश्क़ कहता था वाइज़1 हम उसमें फँस गये बहाये इतने आँसू कि जहाँ खड़े थे वहीं धँस गये न जिगर से ल … more →

Tags: मेरी ग़ज़ल, इश्क़, Heart, Love, Reminisce, दिल, बादल, नसीब, ख़्याल

माज़ी को बहुत खंघालते हैं लोग

विनय wrote 2 years ago: माज़ी को बहुत खंघालते हैं लोग बेतरह मतलब निकालते हैं लोग हुआ कब मुझ से उनका बुरा किसलिए नाम मेरा उछाल … more →

Tags: मेरी ग़ज़ल, वक़्त, लोग, time, आदत, नाम, Pain, कहानी, Friend


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