1.उठ उठ कर उँची आ जाती है किनारों पर ल़हेरें मानती है उनको किनारों से गहरा प्यार है लिपट कर वापस लौट जाती है चुपचाप सी जानती है सच्चाई,सागर उनका असली संसार है. | 2.यूँही कभी मैं ख़याल कर जाउ सोचत… more →
mehhekk wrote 1 year ago: 1.उठ उठ कर उँची आ जाती है किनारों पर ल़हेरें मानती है उनको किनारों से गहरा प्यार है लिपट कर वापस ल … more →
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