रिंद जो मुझको समझते हैं उन्हे होश नहीं मैक़दासाज़ हूं मै मैक़दाबरदोश नहीं पांव उठ सकते नहीं मंज़िल-ए-जाना के ख़िलाफ़ और अगर होश की पूछो तो मुझे होश नहीं अब तो तासीर-ए-ग़म-ए-इश्क़ यहां तक पहुंची के इधर होश अगर… more →
कुछ पल जगजीत सिंह के नामAmarjeet Singh wrote 1 year ago: रिंद जो मुझको समझते हैं उन्हे होश नहीं मैक़दासाज़ हूं मै मैक़दाबरदोश नहीं पांव उठ सकते नहीं मंज़िल-ए-जान … more →
Amarjeet Singh wrote 1 year ago: वस्ल की रात तो राहत से बसर होने दो शाम से ही है ये धमकी के सहर होने दो जिसने ये दर्द दिया है वो दवा … more →
Amarjeet Singh wrote 1 year ago: हर गोशा गुलिस्तां था कल रात जहां मै था एक जश्न-ए-बहारां था कल रात जहां मै था नग़्मे थे हवाओं में जादू … more →
Amarjeet Singh wrote 1 year ago: घर से हम निकले थे मस्जिद की तरफ़ जाने को रिंद बहका के हमें ले गये मैख़ाने को ये ज़बां चलती है नासेह के … more →
Amarjeet Singh wrote 1 year ago: एक दीवाने को ये आये हैं समझाने कई पहले मै दीवाना था और अब हैं दीवाने कई मुझको चुप रहना पड़ा बस आप का … more →
Amarjeet Singh wrote 1 year ago: बज़्म-ए-दुश्मन में बुलाते हो ये क्या करते हो और फिर आँख चुराते हो ये क्या करते हो बाद मेरे कोई मुझ सा … more →
Amarjeet Singh wrote 1 year ago: … more →
Amarjeet Singh wrote 1 year ago: आप को देख कर देखता रह गया, क्या कहुँ और कहने को क्या रह गया, आते आते मेरा नाम सा रह गया, उसके होठों … more →
Amarjeet Singh wrote 1 year ago: तेरे कदमो पे सर होगा, कजा सर पे खडी होगी, फिर उस सजदे का क्या कहना अनोखी बन्दगी होगी, नसीम-ए-सुबह गु … more →
Amarjeet Singh wrote 1 year ago: ठुकराओ अब के प्यार करो, मैं नशे मे हुँ, जो चाहे मेरे यार करो, मैं नशे मे हुँ, अभी दिला रहा हुँ यकीन- … more →
Amarjeet Singh wrote 1 year ago: मैनु तेरा शबाब ले बैठा, रगं गौरा गुलाब ले बैठा, किन्नी- बीती ते किन्नी बाकी है, मैनु एहो हिसाब ले बै … more →
Amarjeet Singh wrote 1 year ago: इश्क की दास्तान है प्यारे, अपनी अपनी जुबान है प्यारे, हम जमाने से इन्तकाम तो ले, एक हसीं दरम्यान है … more →
Amarjeet Singh wrote 1 year ago: चांद के साथ कई दर्द पुराने निकले, कितने गम थे जो तेरे गम के बहाने निकले, फ़सल-ए-गुल आई फ़िर एक बार असी … more →
Amarjeet Singh wrote 1 year ago: ज़रा चेहरे से कमली को हटा दो या रसूल-अल्लाह, हमें भी अपना दीवाना बना दो या रसूल-अल्लाह, मोहब्बत ग़ैर स … more →
Amarjeet Singh wrote 1 year ago: तुझे ढ़ूंढ़ता था मैं चारसूं तेरी शान जल्लेजलाल हूं, तू मिला क़रीब-ए-रग-ए-गुलूं तेरी शान जल्लेजलाल हूं, … more →
Amarjeet Singh wrote 1 year ago: तारीफ़ उस ख़ुदा की जिसने जहां बनाया, कैसी ज़मीं बनाई क्या आसमां बनाया, मिट्टी से बेल फूटे क्या ख़ुशनुमा … more →
Amarjeet Singh wrote 1 year ago: मदीने को जायें ये जी चाहता है, मुक़द्दर बनायें ये जी चाहता है, मदीने के आका दो आलम के मौला, तेरे पास … more →
Amarjeet Singh wrote 1 year ago: दुनिया से दिल लगाकर दुनिया से क्या मिलेगा, याद-ए-ख़ुदा किये जा तुझ को ख़ुदा मिलेगा, दौलत हो या हुकूमत … more →
Amarjeet Singh wrote 1 year ago: चिराग दिल के जलाओ के ईद का दिन है, तराने झूम के गाओ के ईद का दिन है, ग़मों को दिल से भुलाओ के ईद का द … more →