आज महसूस किया मैंने गर तुम्हें किसी और के साथ देखूँ तो मेरे दिल पे क्या गुज़रेगी कैसा महसूस करूँगा बाद उसके… काँच-से कच्चे खा़ब किस तरह चूर होंगे, किस तरह बिखरेंगे, छिटकेंगे मेरे ज़ख़्मों पर मानिन… more →
तख़लीक़-ए-नज़रkmuskan wrote 1 year ago: अपने ही कंधो पे ,अपनी लाश लिए जा रहे है जाने किस , उम्मीद में जिए जा रहे है जानती हूँ ,तू शामिल नही … more →
विनय wrote 2 years ago: आज महसूस किया मैंने गर तुम्हें किसी और के साथ देखूँ तो मेरे दिल पे क्या गुज़रेगी कैसा महसूस करूँगा बा … more →