विनय wrote 1 year ago: एक बार देखा था तुझे हाथों में चिराग़ लिए चौखट पर खड़ी थी चाँद की निगाहें तुझ पर टिकी थीं सारी ज़मीं नव … more →
विनय wrote 1 year ago: देखो ज़रा स्याह रात पे चाँद का पैबंद कितना खिल रहा है मेरे चाँद पे सितारों वाला नीला लिबास जितना खिल … more →