Blogs about: लेखआलेख

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सार और थोथा!1 comment

प्रेमलता पांडे wrote 3 months ago: आज कई दिन बाद लिख रही हूँ क्योंकि काम बहुत था, घर में नहीं कार्यस्थल पर। थोड़ी साँस ली तो सोचा कुछ लि … more →

Tags: पत्र

पहली बार और अब!1 comment

प्रेमलता पांडे wrote 3 months ago: जब स्वतंत्र भारत के पहले चुनाव हुए थे तो माँ-पिताजी बताते थे कि इतना उत्साह था मन में कि पता नहीं क … more →

Tags: मताधिकार

बहुत कुछ लुटा के होश में आए तो सही!3 comments

प्रेमलता पांडे wrote 3 months ago: आजकल जब भी बाज़ार जाते हैं और कुछ ऐसा सामान खरीदते हैं जैसे- सब्जी, फल या अन्य वह सब चीज़ें जो छोटी थ … more →

Tags: चित्राकंन, पर्यावरण, थैले/झोला

ठेकेदारी2 comments

प्रेमलता पांडे wrote 3 months ago: जीवन में ठेकेदारी का बड़ा महात्म्य बताया गया है। हर काम ठेके पर देने से मालिक एक दम निरचु हो जात है, … more →

Tags: ठेकेदारी/ठेकेदार

हम बड़े !!!2 comments

प्रेमलता पांडे wrote 3 months ago: - प्रधानजी/प्रधानाजी गुस्से में गाली दें तो ठीक है क्यों कि उनको प्रधानत्त्व के साथ-साथ विशेषाधिकार … more →

Tags: फोटोशॉप और मैं, बड़े

महिला और समाज 6 comments

प्रेमलता पांडे wrote 3 months ago: महिलाओं की सभी समस्याएँ एक दूसरे से जुड़ी हैं। उनकी जड़े एक ही जगह हैं। समाज और परिवार जब तक अपनी सोच … more →

Tags: समाज, महिला

कुछ इधर-उधर की...3 comments

प्रेमलता पांडे wrote 3 months ago: रहिमन देख बड़ौन को लघु न दीजिए डार, जहाँ काम आवै सुई कहा करे तलवार।’ बचपन में पढ़ी यह कहावत कभी भूली … more →

Tags: लेखन

मन जा बैठा वा चौराहे के बीच 5 comments

प्रेमलता पांडे wrote 4 months ago: हमने होली पर कई जगह पहले भी लिखा है। यहाँ और वहाँ। पर आज मन उड़ चला उस चौराहे पर जहाँ आजकल शाम को सा … more →

Tags: फोटोशॉप और मैं, संस्मरण, यादें

ओह!!! कुछ तो समझो?6 comments

प्रेमलता पांडे wrote 4 months ago: वह अपने पिता से पिट गया। सारे में हल्ला हो गया। जिसे न पता हो उसे भी पता चल गया। हाय री दुनिया! बच्च … more →

प्रसीद प्रसीद प्रभो!1 comment

प्रेमलता पांडे wrote 4 months ago: शिव कर्ता, धर्ता, हर्ता, कहे गए हैं। उनसा दानी, उनसा ग़ुस्सैल कोई नहीं। औघड़, मलंग न जाने उनके कितने … more →

Tags: शिव, शिव-रात्रि

प्यार की बात न हो तो अच्छा है...5 comments

प्रेमलता पांडे wrote 4 months ago: ’प्यार की बात न हो तो अच्छा है, बिन बात ही प्यार होतो सच्चा है। प्यार की बात का तो अर्थ होता है, प् … more →

Tags: भावांजलि, प्रेम

और सब यहीं छूट गया6 comments

प्रेमलता पांडे wrote 6 months ago: थोड़ी सी खाँसी उठी और हृदय-गति रुक गयी। संसार में शरीर पड़ा रहा, आत्मा निकल गयी। यही जीवन है। एक कम सा … more →

Tags: नश्वरता

बोल गंगा मैया की जय!6 comments

प्रेमलता पांडे wrote 7 months ago: गंगोत्री ग्लेशियर से निकली तीनों धाराएँ अलकनंदा, मंदाकिनी और भागीरथी हिमालय की गोद छोड़कर नीचे धाती ह … more →

Tags: गंगा

हम तो ऐसे ही रह गए!4 comments

प्रेमलता पांडे wrote 8 months ago: ज़िंदगी जीने का अंदाज़ सबका अलग-अलग होता है। सबके सुखों की परिभाषा भी अलग होती हैं। सैंतीस साल से अध्य … more →

Tags: खुशियाँ

साँवरिया के रंग पर चढ़े न दूजो रंग7 comments

प्रेमलता पांडे wrote 8 months ago: ले रंग पर कोई और रंग नहीं चढ़ पाता है। रंगरेज लाख कोशिश करे पर काला तो अमिट होता है। इसके पक्केपन के … more →

Tags: चिट्ठा

मन बहौ जाए वा यमुना के संग

प्रेमलता पांडे wrote 8 months ago: हम शाम लगभग पाँच बजे जानकीचट्टी पहुँच गए। अति शीतल हवा और बर्फ के नन्हे कणों के समान फुहारों ने हमें … more →

Tags: यात्रा, यमुनोत्री, नज़ारा, जानकीचट्टी

भैन-भाई के प्यार की अनूठी कहानी1 comment

प्रेमलता पांडे wrote 8 months ago: हमारी दादी जिनको (बहत्तर साल की आयु में) दिवगंत हुए भी पैंतालीस साल से ऊपर हो गए हैं, यह कहानी सुनाय … more →

Tags: त्योहार, भाई-दूज

अभियाँत्रिकी को प्रणाम1 comment

प्रेमलता पांडे wrote 8 months ago: आज अन्नकूट और गोवर्धन पूजा का उत्सव है और विश्वकर्मा-दिवस भी है। सभी के पीछे बहुत गहरी आस्था और विश् … more →

Tags: त्योहार, अन्नकूट, गोवर्धन, विश्वकर्मा-दिवस

कौन कब्ज़ा कर ले!2 comments

प्रेमलता पांडे wrote 9 months ago: घर से दो दिन के लिए ही क्यों न जाओ डर ही रहता है कब कौन कब्ज़ा करले! समय ही ऐसा है। सब को अपनी-अपनी प … more →

Tags: कबूतर, पर्यावरण


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