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Blogs about: लेखआलेख

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बच्चा, बचपन और व्यवहार (२)6 comments

प्रेमलता पांडे wrote 1 month ago: बच्चा, बचपन और व्यवहार (२) पहले लेख में कहा गया था कि परिवारों में हो रहे परिवर्तन बच्चे के व्यवहार … more →

Tags: बचपन और व्यवहार, बच्चा

बच्चा, बचपन और व्यवहार (१)9 comments

प्रेमलता पांडे wrote 1 month ago: आजकल बच्चे पहले समय के बच्चों जैसा व्यवहार नहीं करते, उनमें वो मासूमियत नहीं है। वे ऐसे हैं, वे वैसे … more →

Tags: आम-जीवन, बचपन और व्यवहार, बच्चा, Child

व्रत2 comments

प्रेमलता पांडे wrote 2 months ago: व्रत का अर्थ – कोई प्रण या प्रतिज्ञा लेना है। शपथ के आसपास का ही होता है व्रत। कोई भी व्रत लेन … more →

Tags: विरासत, आम-जीवन, सच्ची बात, व्रत

क्या ये सही नहीं रहेगा4 comments

प्रेमलता पांडे wrote 2 months ago: आज पढ़ा कि विश्व बैंक गंगा को शुद्ध करने के लिए कुछ राशि देने जा रहा है। ठीक वैसी ही अनुभूति हुई जैसी … more →

Tags: विरासत, हलचल, गंगा

शरद पूर्णिमा और सेनापति

प्रेमलता पांडे wrote 2 months ago: इसके आगे पढ़ने के लिए कृपया यहाँ जाएँ। …………………… … more →

Tags: विरासत, सेनापति

मन खोलने से पहले ज़रा सोचें…5 comments

प्रेमलता पांडे wrote 2 months ago: मन खोलने से पहले ज़रा सोचें… अपनी बात कहने के अनेक ढंग हैं। रोने, हंसने, गाने, बजाने, नृत्य, लेखन, चि … more →

Tags: त्योहार, मन, ईद

यह गुरु-पर्व नहीं, शिक्षक-दिवस है9 comments

प्रेमलता पांडे wrote 3 months ago: पाँच सितंबर हमारे देश में शिक्षक-दिवस के रुप में मनाया जाता है। डॉ० राधाकृष्णन के जन्म-दिन पर। यह गु … more →

Tags: हंसी-मज़ाक, गुरु, शिक्षक, शिक्षक दिवस, teachers day

अत्याधुनिकता प्लास्टिक तो नहीं?5 comments

प्रेमलता पांडे wrote 4 months ago: हमारे देखते-देखते धातुओं को आऊट ऑफ़ फ़ैशन कहलवाने वाली प्लास्टिक ने क्रांति मचा दी और लोग उसके प्रयोग … more →

Tags: प्लास्टिक, आधुनिकता

साहित्य और ब्लॉग10 comments

प्रेमलता पांडे wrote 4 months ago: ब्लॉग पर लिखी सामग्री साहित्य का प्रकार है या नहीं? यह प्रश्न ऐसा ही है जैसे ’(मानव का) बच्चा मनुष्य … more →

Tags: राजभाषा हिंदी, ब्लॉग और साहित्य, blog and literature

गुरु को नमः5 comments

प्रेमलता पांडे wrote 5 months ago: हमने पिछले साल गुरु -पूर्णिमा पर एक लेख लिखा था, चाहूंगी जो यहाँ आए वह लेख भी अवश्य पढ़े। माता-पिता ह … more →

Tags: गुरु, शुक्राचार्य

सार और थोथा!1 comment

प्रेमलता पांडे wrote 8 months ago: आज कई दिन बाद लिख रही हूँ क्योंकि काम बहुत था, घर में नहीं कार्यस्थल पर। थोड़ी साँस ली तो सोचा कुछ लि … more →

Tags: पत्र

पहली बार और अब!1 comment

प्रेमलता पांडे wrote 8 months ago: जब स्वतंत्र भारत के पहले चुनाव हुए थे तो माँ-पिताजी बताते थे कि इतना उत्साह था मन में कि पता नहीं कै … more →

Tags: मताधिकार

बहुत कुछ लुटा के होश में आए तो सही!3 comments

प्रेमलता पांडे wrote 8 months ago: आजकल जब भी बाज़ार जाते हैं और कुछ ऐसा सामान खरीदते हैं जैसे- सब्जी, फल या अन्य वह सब चीज़ें जो छोटी थै … more →

Tags: चित्राकंन, पर्यावरण, थैले/झोला

ठेकेदारी2 comments

प्रेमलता पांडे wrote 9 months ago: जीवन में ठेकेदारी का बड़ा महात्म्य बताया गया है। हर काम ठेके पर देने से मालिक एक दम निरचु हो जात है, … more →

Tags: ठेकेदारी/ठेकेदार

हम बड़े !!!2 comments

प्रेमलता पांडे wrote 9 months ago: - प्रधानजी/प्रधानाजी गुस्से में गाली दें तो ठीक है क्यों कि उनको प्रधानत्त्व के साथ-साथ विशेषाधिकार … more →

Tags: फोटोशॉप और मैं, बड़े

महिला और समाज 6 comments

प्रेमलता पांडे wrote 9 months ago: महिलाओं की सभी समस्याएँ एक दूसरे से जुड़ी हैं। उनकी जड़े एक ही जगह हैं। समाज और परिवार जब तक अपनी सोच … more →

Tags: समाज, महिला

कुछ इधर-उधर की...3 comments

प्रेमलता पांडे wrote 9 months ago: रहिमन देख बड़ौन को लघु न दीजिए डार, जहाँ काम आवै सुई कहा करे तलवार।’ बचपन में पढ़ी यह कहावत कभी भूली न … more →

Tags: लेखन

मन जा बैठा वा चौराहे के बीच 5 comments

प्रेमलता पांडे wrote 9 months ago: हमने होली पर कई जगह पहले भी लिखा है। यहाँ और वहाँ। पर आज मन उड़ चला उस चौराहे पर जहाँ आजकल शाम को सार … more →

Tags: फोटोशॉप और मैं, संस्मरण, यादें

ओह!!! कुछ तो समझो?6 comments

प्रेमलता पांडे wrote 9 months ago: वह अपने पिता से पिट गया। सारे में हल्ला हो गया। जिसे न पता हो उसे भी पता चल गया। हाय री दुनिया! बच्च … more →


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