बच्चा, बचपन और व्यवहार (२) पहले लेख में कहा गया था कि परिवारों में हो रहे परिवर्तन बच्चे के व्यवहार को बदलने का एक कारण है। चूंकि परिवार का ढ़ाचा ही बदल रहा है, जीवन-चर्या बदल रही है अधिकार बदल रहे हैं… more →
पसंदप्रेमलता पांडे wrote 1 month ago: बच्चा, बचपन और व्यवहार (२) पहले लेख में कहा गया था कि परिवारों में हो रहे परिवर्तन बच्चे के व्यवहार … more →
प्रेमलता पांडे wrote 1 month ago: आजकल बच्चे पहले समय के बच्चों जैसा व्यवहार नहीं करते, उनमें वो मासूमियत नहीं है। वे ऐसे हैं, वे वैसे … more →
प्रेमलता पांडे wrote 2 months ago: व्रत का अर्थ – कोई प्रण या प्रतिज्ञा लेना है। शपथ के आसपास का ही होता है व्रत। कोई भी व्रत लेन … more →
प्रेमलता पांडे wrote 2 months ago: आज पढ़ा कि विश्व बैंक गंगा को शुद्ध करने के लिए कुछ राशि देने जा रहा है। ठीक वैसी ही अनुभूति हुई जैसी … more →
प्रेमलता पांडे wrote 2 months ago: इसके आगे पढ़ने के लिए कृपया यहाँ जाएँ। …………………… … more →
प्रेमलता पांडे wrote 2 months ago: मन खोलने से पहले ज़रा सोचें… अपनी बात कहने के अनेक ढंग हैं। रोने, हंसने, गाने, बजाने, नृत्य, लेखन, चि … more →
प्रेमलता पांडे wrote 3 months ago: पाँच सितंबर हमारे देश में शिक्षक-दिवस के रुप में मनाया जाता है। डॉ० राधाकृष्णन के जन्म-दिन पर। यह गु … more →
प्रेमलता पांडे wrote 4 months ago: हमारे देखते-देखते धातुओं को आऊट ऑफ़ फ़ैशन कहलवाने वाली प्लास्टिक ने क्रांति मचा दी और लोग उसके प्रयोग … more →
प्रेमलता पांडे wrote 4 months ago: ब्लॉग पर लिखी सामग्री साहित्य का प्रकार है या नहीं? यह प्रश्न ऐसा ही है जैसे ’(मानव का) बच्चा मनुष्य … more →
प्रेमलता पांडे wrote 5 months ago: हमने पिछले साल गुरु -पूर्णिमा पर एक लेख लिखा था, चाहूंगी जो यहाँ आए वह लेख भी अवश्य पढ़े। माता-पिता ह … more →
प्रेमलता पांडे wrote 8 months ago: आज कई दिन बाद लिख रही हूँ क्योंकि काम बहुत था, घर में नहीं कार्यस्थल पर। थोड़ी साँस ली तो सोचा कुछ लि … more →
प्रेमलता पांडे wrote 8 months ago: जब स्वतंत्र भारत के पहले चुनाव हुए थे तो माँ-पिताजी बताते थे कि इतना उत्साह था मन में कि पता नहीं कै … more →
प्रेमलता पांडे wrote 8 months ago: आजकल जब भी बाज़ार जाते हैं और कुछ ऐसा सामान खरीदते हैं जैसे- सब्जी, फल या अन्य वह सब चीज़ें जो छोटी थै … more →
प्रेमलता पांडे wrote 9 months ago: जीवन में ठेकेदारी का बड़ा महात्म्य बताया गया है। हर काम ठेके पर देने से मालिक एक दम निरचु हो जात है, … more →
प्रेमलता पांडे wrote 9 months ago: - प्रधानजी/प्रधानाजी गुस्से में गाली दें तो ठीक है क्यों कि उनको प्रधानत्त्व के साथ-साथ विशेषाधिकार … more →
प्रेमलता पांडे wrote 9 months ago: महिलाओं की सभी समस्याएँ एक दूसरे से जुड़ी हैं। उनकी जड़े एक ही जगह हैं। समाज और परिवार जब तक अपनी सोच … more →
प्रेमलता पांडे wrote 9 months ago: रहिमन देख बड़ौन को लघु न दीजिए डार, जहाँ काम आवै सुई कहा करे तलवार।’ बचपन में पढ़ी यह कहावत कभी भूली न … more →
प्रेमलता पांडे wrote 9 months ago: हमने होली पर कई जगह पहले भी लिखा है। यहाँ और वहाँ। पर आज मन उड़ चला उस चौराहे पर जहाँ आजकल शाम को सार … more →
प्रेमलता पांडे wrote 9 months ago: वह अपने पिता से पिट गया। सारे में हल्ला हो गया। जिसे न पता हो उसे भी पता चल गया। हाय री दुनिया! बच्च … more →