मस्जिदों में भी साक़ी का नाम लेता हूँ वूज़ू के वास्ते हाथों में जाम लेता हूँ नशा कराके तो सब ही गिराया करते हैं मेरी फ़ितरत है गिरतों को थाम लेता हूँ सब से छुप के मोहब्बत में कोई लम्स नहीं मै तो वादा-ए-द… more →
इक शायर अंजाना सा...Rohit Jain wrote 1 year ago: मस्जिदों में भी साक़ी का नाम लेता हूँ वूज़ू के वास्ते हाथों में जाम लेता हूँ नशा कराके तो सब ही गिराया … more →