टूटे सुजन मनाईये, जौ टूटे सौ बार रहिमन फिर पोहिए, टूटे मुक्ताहार कवि रहीम कहते हैं कि जिस प्रकार सच्चे मोतियों का हर टूट जाने पर बार-बार पिरोया जाता है, उसी प्रकार यदि सज्जन सौ बार भी नाराज हो जाये … more →
****दीपकबापू कहिन**** ****Deepak Bharatdeep's hindi patrika****दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: टूटे सुजन मनाईये, जौ टूटे सौ बार रहिमन फिर पोहिए, टूटे मुक्ताहार कवि रहीम कहते हैं कि जिस प्रकार स … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: 1. हजारों गायों की बीच जिस तरह बछड़ा अपनी मा के पास जाता है वैसे ही मनुष्य का कर्म भी उसी में … more →