रास्तों पे सब ही पहचाने से लोग हैं देखो करीब से तो अंजाने से लोग हैं दिल में झांकोगे तो बस तन्हाईयां ही हैं महफ़िल सजी है फिर भी वीराने से लोग हैं करते हैं इश्क़ जानकर अंजाम इश्क़ का नासमझ से लोग दीवाने … more →
इक शायर अंजाना सा...उन्मुक्त wrote 5 months ago: कुछ समय पहले, मैथली गुप्त जी ने, कैफे हिन्दी नामक एक वेबसाइट शुरू की। मैं न तो मैथली जी को, न ही इस … more →
विनय wrote 6 months ago: जो लोग अच्छे होते हैं दिखते नहीं हैं चाहने वाले बाज़ार में बिकते नहीं हैं ख़ुद से पराया ग़ैरों से अपन … more →
दीपक भारतदीप wrote 8 months ago: जिनको माना था सरताज वह असलियत में सियार निकल आये भरोसा किया था जिन पर वह मतलब निकालकर होशियार कहलाये … more →
दीपक भारतदीप wrote 9 months ago: सास ने कहा बहू से ‘देखो, आज है राखी का दिन सब बहनों को भाईयों से निभाना तुम जल्दी भाई को जाकर राखी ब … more →
दीपक भारतदीप wrote 10 months ago: जिनको माना था सरताज वह असलियत में सियार निकल आये भरोसा किया था जिन पर वह मतलब निकालकर होशियार कहलाये … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: रास्तों पे सब ही पहचाने से लोग हैं देखो करीब से तो अंजाने से लोग हैं दिल में झांकोगे तो बस तन्हाईयां … more →
विनय wrote 1 year ago: जैसे-तैसे निभाते हैं प्यार करके पछताते हैं सच्चे-झूठे सपने तेरे रातों की नींदें उड़ाते हैं दो किनारे … more →
विनय wrote 1 year ago: क्यों लोग यहाँ जमा हैं? क्यों वह उदास बैठा है? कुछ तो बोलो! मेरी साँसें उखड़ रही हैं शायिर: विनय प्र … more →
विनय wrote 1 year ago: दिल से पूछो, इसकी मोहब्बत क्या है दिल बतायेगा इसकी चाहत क्या है बस तुम हो बस तुम हो सिर्फ़ तुम हो जैस … more →
विनय wrote 1 year ago: लोग कहते हैं इश्क़ ने किया है मुझको गुमराह दुनिया में आया हूँ जिसके लिए करे मुझको ज़िबह जिसके लम्स ने … more →
विनय wrote 1 year ago: माज़ी को बहुत खंघालते हैं लोग बेतरह मतलब निकालते हैं लोग हुआ कब मुझ से उनका बुरा किसलिए नाम मेरा उछाल … more →